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आपराधिक इतिहास वाले वकीलों की खैर नहीं
Balrampur: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने प्रदेश की समस्त संबद्ध बार एसोसिएशनों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उच्च न्यायालय द्वारा याचिका मोहम्मद कफील बनाम स्टेट ऑफ यूपी एवं अन्य में 3 जून 2026 को पारित आदेश का अनुपालन करते हुए यह कदम उठाया गया है। काउंसिल ने सभी बार एसोसिएशनों से ऐसे अधिवक्ताओं की सूची 15 दिनों के भीतर मांगी है, जिनके खिलाफ गंभीर अपराधों की प्राथमिकी दर्ज है, जो आरोप पत्रित हैं या जिनके मामले अदालत में विचाराधीन हैं।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाली बार एसोसिएशनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित बार एसोसिएशन की मान्यता रद्द की जा सकती है। साथ ही, उसके सदस्यों को काउंसिल द्वारा संचालित किसी भी लाभकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
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काउंसिल ने कहा है कि समय पर सूची उपलब्ध नहीं कराने वाली बार एसोसिएशनों को न्यायालय के आदेश की अवहेलना का दोषी माना जाएगा। ऐसे मामलों की रिपोर्ट सीधे इलाहाबाद उच्च न्यायालय को भेजी जाएगी। आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के सभी जिला जजों, जिलाधिकारियों और पुलिस प्रशासन को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजकर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जिला बार संघ के महामंत्री संजय तिवारी ने बताया कि इस मामले में पुलिस प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरी रणनीति तैयार की जाएगी। पुलिस से अधिवक्ताओं की आपराधिक पृष्ठभूमि संबंधी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, कलेक्ट्रेट बार संघ के महामंत्री अशोक मिश्रा ने कहा कि फिलहाल उन्हें संबंधित पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने के बाद बार संघ के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
Location : Balrampur
Published : 25 July 2026, 8:28 PM IST