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अमित जोगी(Source: Google)
New Delhi: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड (2003) में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक और जेसीसीजे (JCCJ) नेता अमित जोगी को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी के सरेंडर करने की समय सीमा पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद उनकी तत्काल गिरफ्तारी और उम्र कैद की सजा की तामील पर अस्थायी रूप से विराम लग गया है।
अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख आदेशों के खिलाफ याचिका दायर की थी। पहली याचिका सीबीआई को अपील की अनुमति देने के खिलाफ थी और दूसरी छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले के विरुद्ध थी जिसमें उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक जोगी को सरेंडर करने की आवश्यकता नहीं है।
इससे पहले, बिलासपुर हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को हत्या का दोषी पाया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जोगी को 23 अप्रैल तक संबंधित अदालत में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट के इसी आदेश को अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहाँ उन्हें बड़ी राहत मिली।
यह मामला छत्तीसगढ़ के शुरुआती वर्षों का सबसे हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामला माना जाता है। 4 जून 2003 को रायपुर के मौदहापारा इलाके में एनसीपी (NCP) नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अमित जोगी सहित कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, शुरुआती ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां उन्हें दोषी करार दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। अमित जोगी के समर्थक इस फैसले को न्याय की पहली जीत बता रहे हैं और इसे बड़ी राहत मान रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों और जग्गी परिवार का कहना है कि यह केवल अंतरिम रोक है और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है।
Location : New Delhi
Published : 23 April 2026, 12:59 PM IST