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गणतंत्र दिवस की छुट्टी के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। सेंसेक्स करीब 380 अंक फिसला, जबकि निफ्टी 25,000 के आसपास बना रहा। बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में दबाव दिखा।
शेयर मार्केट अपडेट (Img: Google)
Mumbai: गणतंत्र दिवस की छुट्टी के बाद हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए निराशाजनक रही। मंगलवार को बाजार गिरावट के साथ खुला। सुबह करीब 9:15 बजे बीएसई सेंसेक्स लगभग 380 अंकों की कमजोरी के साथ ट्रेड करता नजर आया, जो पिछले कारोबारी सत्र के 81,537.70 के बंद स्तर से नीचे रहा। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी दबाव में रहा और 20.90 अंक यानी 0.08 प्रतिशत गिरकर 25,027.75 के स्तर पर पहुंच गया।
कारोबार के शुरुआती घंटों में बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में हल्की से मध्यम बिकवाली देखने को मिली। प्रमुख बैंकों और आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जिससे बाजार की धारणा कमजोर रही। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जहां कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में खरीदारी भी दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों से निवेशकों को स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी। अमेरिकी शेयर बाजारों में फेडरल रिजर्व की स्थिर मौद्रिक नीति की उम्मीदों और बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों के कारण रातभर मजबूती देखने को मिली। इसके उलट, एशियाई बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना रहा। दक्षिण कोरिया पर संभावित ऊंचे टैरिफ की चेतावनी ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंकाओं को हवा दी, जिसका असर एशियाई सूचकांकों पर पड़ा।
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कमोडिटी बाजार में भी विरोधाभासी रुझान देखने को मिला। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने की कीमतें $5,000 प्रति औंस से ऊपर मजबूती के साथ बनी रहीं, जिससे सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर इसकी मांग कायम रही। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई, जिसने ऊर्जा शेयरों पर सीमित दबाव बनाया।
विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजारों में जारी कमजोरी के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, रुपये पर दबाव, अब तक आए तीसरी तिमाही के कमजोर नतीजे और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। बाजार में भरोसा लौटने के लिए कॉरपोरेट आय में ठोस सुधार और वैश्विक व्यापार वार्ताओं से सकारात्मक संकेतों की जरूरत बताई जा रही है।
तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से भी बाजार फिलहाल कमजोर स्थिति में है। निफ्टी के लिए 25,200 से 25,300 का दायरा तत्काल रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 25,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह सपोर्ट टूटता है, तो बाजार में और गहरी गिरावट संभव है। हालांकि, ओवरसोल्ड स्थिति के चलते चुनिंदा शेयरों में शॉर्ट-टर्म राहत भरी तेजी देखने को मिल सकती है।