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भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 102 अंक फिसला और निफ्टी 26,150 के नीचे बंद हुआ। जानिए बाजार गिरने के 3 बड़े कारण, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आगे का आउटलुक।
शेयर बाजार में गिरावट
New Delhi: भारतीय शेयर बाजारों में 9 जनवरी को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी देखने को मिली। दिनभर के कारोबार के दौरान बाजार दबाव में रहा और एक समय सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 26,100 के नीचे फिसल गया। भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर बना रहा।
हालांकि आखिरी घंटे में बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी की कोशिश की और नुकसान सीमित हुआ। कारोबार के अंत में BSE सेंसेक्स 102.20 अंक या 0.12 फीसदी की गिरावट के साथ 84,961.14 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं NSE निफ्टी 37.95 अंक या 0.14 फीसदी फिसलकर 26,140.75 पर बंद हुआ।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ से जुड़ी नई चिंताओं ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली भी गिरावट की एक बड़ी वजह है। इनरीच के CEO पोनमुदी आर के अनुसार मौजूदा माहौल में बाजार किसी बड़े ट्रेंड की बजाय स्टॉक और सेक्टर आधारित मूवमेंट दिखा सकता है।
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 107.63 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशक लगभग 3,100 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। विदेशी पूंजी की यह लगातार निकासी बाजार में लिक्विडिटी पर दबाव बना रही है जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
Share Market: लगातार दूसरे दिन दबाव, सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ खुले, निवेशकों में सतर्कता
एशियाई बाजारों से भी आज नकारात्मक संकेत मिले। जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में बनी अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया।
बुधवार के कारोबार में आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में दबाव देखने को मिला। वहीं चुनिंदा फार्मा और टेक शेयरों में हल्की खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से संभाल लिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित गिरावट दर्ज की गई।
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विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेतों में सुधार नहीं होता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं थमती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने, शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से बचने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।