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बदायूं में पाल समाज ने राज्यपाल उत्तर प्रदेश के नाम ज्ञापन सौंपा। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़ने और मंदिरों को क्षति पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
पाल समाज में भारी आक्रोश, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
Budaun: पाल समाज के लोगों ने बदायूं जिला अधिकारी को राज्यपाल उत्तर प्रदेश के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़ने और घाट के मंदिरों को क्षतिग्रस्त करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि समाज के युवाओं पर लगे झूठे मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होलकर ने कराया था, जो नगर निगम वाराणसी के कर्मचारियों और अधिकारियों के देखरेख में हुआ। लेकिन हाल ही में घाट पर लगी अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति को अधिकारियों ने तोड़ दिया, जबकि मंदिरों के प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं दी गई। इस कार्रवाई से कई मंदिरों को भी क्षति पहुंची है, जिससे समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।
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पाल समाज के नेताओं ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़ने वाले अधिकारियों और मंदिरों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, समाज के युवाओं पर झूठे आरोप लगाकर दर्ज किए गए मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बदायूं में विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे।
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी और गडरिया समाज ने भी खुलकर समर्थन जताया। दोनों संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे जनपद में बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। इसके तहत वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे और शासन के खिलाफ आवाज उठाएंगे।
घटना के बाद समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है। लोगों का कहना है कि अहिल्याबाई होलकर ने मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, और उनकी मूर्ति तोड़ना समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। स्थानीय नेता और समाज के वरिष्ठ सदस्य भी प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ज्ञापन के माध्यम से पाल समाज ने प्रशासन पर स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर उनकी मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया, तो जनपद में विरोध प्रदर्शन का दायरा और व्यापक होगा। समाज का मानना है कि मूर्ति तोड़ने और मंदिरों को क्षति पहुंचाने की घटना केवल स्थानीय प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति के खिलाफ भी गंभीर उल्लंघन है।
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समाज के नेतृत्व ने बताया कि बदायूं में धरना प्रदर्शन के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है। इस प्रदर्शन में समाज के सभी वर्गों के लोग भाग लेंगे। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाबदेही की मांग की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।