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जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह इस्तीफा उन्होंने सरकार के समर्थन और शंकराचार्य के विरोध में दिया है, जिसे उन्होंने अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और व्यक्तिगत सम्मान से जोड़ा है।
जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार का इस्तीफा
Ayodhya: उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य के बयान को लेकर उठा विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस विवाद के बीच अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है।
“जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, उसके मुखिया का अपमान नहीं सह सकता”
प्रशांत कुमार सिंह ने अपने इस्तीफे में भावुक शब्दों में लिखा कि जिस प्रदेश की सेवा कर रहे हैं और जहां के वेतन से उनका परिवार चलता है, उस प्रदेश के मुखिया के लिए असंसदीय भाषा का प्रयोग उन्हें बेहद पीड़ादायक लगा। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर भी दिल है, संवेदना है। मैं यूपी कर्मचारी नियमावली से बंधा हूं, लेकिन दो दिनों से इस मानसिक पीड़ा को सहन नहीं कर पा रहा था, इसलिए राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया।”
सरकारी सेवा में रहते हुए भी जताई पीड़ा
डिप्टी कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हो जाता, तब तक वह पूरी निष्ठा के साथ अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस्तीफा मंजूर होने के बाद वह अपने पास उपलब्ध साधनों से समाजसेवा का कार्य करेंगे और सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।
विरोध का तरीका संविधान में तय
प्रशांत सिंह ने शंकराचार्य के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान में विरोध करने के तरीके तय हैं। उन्होंने कहा, “ठेला-गाड़ी पर बैठकर मुख्यमंत्री को उल्टा-सीधा कहना ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री हमारे अन्नदाता हैं, प्रदेश के मुखिया हैं। ऐसे बयान समाज में भ्रम और नफरत फैलाते हैं।” उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अपील की, जो समाज को बांटने का काम करते हैं।
समाज में विभाजन पर जताई चिंता
जीएसटी डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि इस तरह के बयान समाज को जातियों में बांटते हैं और आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे किसी भी बयान का विरोध करते हैं, जिससे सामाजिक एकता कमजोर होती हो। उनका कहना था कि आलोचना हो सकती है, लेकिन मर्यादा और गरिमा के दायरे में रहकर।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने भी इस्तीफा दिया था। उस इस्तीफे की वजह यूजीसी का नया कानून और अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई को बताया गया था। अब प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे से यह साफ हो गया है कि प्रशासनिक सेवा में कार्यरत अधिकारी भी मौजूदा विवादों को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर के इस कदम के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। समर्थक इसे मुख्यमंत्री के सम्मान में उठाया गया साहसिक कदम बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे प्रशासनिक तटस्थता से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।