IT सेक्टर में हाहाकार: 7.81 लाख करोड़ का मार्केट कैप डूबा, निवेशकों की चिंता बढ़ी; जानिए वजह

भारतीय आईटी सेक्टर इस साल निवेशकों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों का मार्केट कैप 7 महीनों में 25% तक गिर गया है। इसका कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कमजोर तिमाही नतीजे, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और छंटनी जैसे फैसले। दिसंबर 2023 में जहां इन कंपनियों का PE रेशियो 25.5 था, वह अब घटकर 22.3 रह गया है। इस पर विशेषज्ञों का क्या मानना है पढ़ें यहां…।

Updated : 12 August 2025, 12:59 PM IST
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New Delhi: इस साल भारतीय शेयर बाजार में सबसे बड़ी चोट आईटी सेक्टर को लगी है। इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले सात महीनों में इन कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 25% तक की गिरावट आई है। यह गिरावट पिछले पांच वर्षों में आईटी सेक्टर के लिए सबसे खराब प्रदर्शन के रूप में दर्ज की गई है।

मार्केट कैप में ₹7.81 लाख करोड़ की कमी

बीएसई (BSE) पर लिस्टेड टॉप पांच आईटी कंपनियों का कुल मार्केट कैप दिसंबर 2023 में 32.67 ट्रिलियन रुपये था, जो अब घटकर सिर्फ 24.86 ट्रिलियन रुपये रह गया है। यानी इन कंपनियों के मार्केट कैप से करीब ₹7.81 लाख करोड़ उड़ गए हैं। सबसे ज्यादा असर टीसीएस पर पड़ा है, जिसका मार्केट कैप 26% तक घटा है। इसके अलावा इंफोसिस में 24.3%, एचसीएल टेक में 23.1%, विप्रो में 20.7% और टेक महिंद्रा में 13.2% की गिरावट दर्ज की गई है।

Stock Market Loss

प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स-इंटरनेट)

PE रेशियो में गिरावट

इन कंपनियों का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो भी लगातार गिरता जा रहा है। दिसंबर 2023 में इनका ट्रेलिंग PE 25.5 गुना था, जो अब घटकर 22.3 गुना रह गया है। गौरतलब है कि दिसंबर 2021 में यह रेशियो 36 गुना के रिकॉर्ड स्तर पर था। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक अब आईटी कंपनियों के मुनाफे के मुकाबले उन्हें कम वैल्यू दे रहे हैं।

आईटी सेक्टर में गिरावट के प्रमुख कारण...

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौती

नई एआई तकनीकों के चलते पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग में गिरावट का खतरा बढ़ा है।

कमजोर तिमाही नतीजे

हाल की तिमाहियों में इन कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा है।

वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी टैरिफ

अमेरिका की नई ट्रेड टैरिफ नीति और वैश्विक आर्थिक मंदी का असर इन कंपनियों के निर्यात और कॉन्ट्रैक्ट्स पर पड़ा है।

छंटनी और निवेशकों का भरोसा

खासतौर पर टीसीएस द्वारा बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

क्या करें निवेशक?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है, लेकिन आने वाले महीनों में एआई और ऑटोमेशन के प्रभाव को देखते हुए आईटी कंपनियों को खुद को नए तकनीकी परिवेश के हिसाब से ढालना होगा। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे जल्दबाजी में किसी भी फैसले से बचें और किसी निवेश विशेषज्ञ से राय लेकर ही कदम उठाएं।

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सूचना के उद्देश्य से दी गई है। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। डाइनामाइट न्यूज़ किसी को निवेश की सीधी सलाह नहीं देता।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 12 August 2025, 12:59 PM IST

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