जनता दर्शन में उमड़ रही भीड़, क्या जमीनी स्तर पर अटक रहा है न्याय? हरदोई में जमीन विवादों की भरमार

उत्तर प्रदेश में जनता दर्शन के बावजूद फरियादियों की बढ़ती भीड़ जमीनी स्तर पर कार्रवाई की पोल खोल रही है। हरदोई समेत कई जिलों में जमीन और घरेलू विवादों के मामलों में लोगों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।

Hardoi: उत्तर प्रदेश में फरियादियों की लंबी कतारें एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। ऊपर से सख्त निर्देश, नीचे से ढीली कार्रवाई आखिर न्याय की राह में रुकावट कहां है? सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों को हिदायत देते हैं कि जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और समय पर समाधान किया जाए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

जनता दर्शन में बढ़ती भीड़

प्रदेश में थानों से लेकर जिलों के बड़े अधिकारियों तक ‘जनता दर्शन’ का सिलसिला लगातार जारी है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक रोजाना लोगों की शिकायतें सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देते हैं। लेकिन अगर सब कुछ सही तरीके से निपट रहा होता तो फरियादियों की भीड़ धीरे-धीरे कम हो जानी चाहिए थी। हकीकत यह है कि भीड़ कम होने के बजाय और बढ़ती नजर आ रही है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं न कहीं आदेशों के क्रियान्वयन में कमी रह जा रही है।

हरदोई की तस्वीर

अगर हरदोई जनपद की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा मामले जमीन कब्जे, खेत की मेढ़ काटने, आपसी बंटवारे और घरेलू विवादों के सामने आ रहे हैं। पति-पत्नी के झगड़े से लेकर भाइयों के बीच संपत्ति विवाद तक, तमाम मामले अधिकारियों की चौखट तक पहुंच रहे हैं। बड़े अधिकारी दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश तो देते हैं, लेकिन नीचे स्तर पर तैनात कुछ जिम्मेदार कर्मचारी इन आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते।

निचले स्तर पर लापरवाही या कुछ और?

स्थानीय स्तर पर लेखपाल, दारोगा या सिपाही की भूमिका बेहद अहम होती है। आरोप यह है कि कुछ मामलों में सही जांच की जगह फर्जी आख्या लगाकर फाइल बंद कर दी जाती है। कई फरियादी बताते हैं कि उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भ्रष्टाचार और लापरवाही की वजह से मामलों को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है?

दर-दर भटकते फरियादी

थानों से लेकर उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाने के बावजूद कई लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। जनता दर्शन में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि सिस्टम में कहीं न कहीं सुधार की जरूरत है। जब तक निचले स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऊपर से दिए गए सख्त निर्देश भी कागजों तक सीमित रह सकते हैं। जनता को भरोसा है कि सरकार की मंशा साफ है, लेकिन अब जरूरत है उस मंशा को जमीनी हकीकत में बदलने की, ताकि फरियादियों को राहत मिल सके और न्याय सच मायनों में घर-घर तक पहुंचे।

Location : 
  • Hardoi

Published : 
  • 13 February 2026, 10:34 PM IST

Advertisement
Advertisement