सोना-चांदी में तेज उतार-चढ़ाव, गिरावट के बाद फिर लौटी चमक? जानें निवेशकों के लिए क्या है संकेत

सोना-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच MCX पर हल्की रिकवरी के संकेत। जानें क्या जारी रह सकती है तेजी, निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति और फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 13 February 2026, 10:08 AM IST
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New Delhi: साल 2026 में सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले साल आई ऐतिहासिक तेजी के बाद दोनों कीमती धातुएं अपने उच्च स्तर से 16 से 43 प्रतिशत तक फिसल चुकी हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ब्याज दरों के दबाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। हालांकि हालिया सत्रों में बाजार में हल्की रिकवरी के संकेत भी मिले हैं, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ने लगी है।

MCX पर ताजा भाव

राष्ट्रीय वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोना फिलहाल लगभग ₹1,50,000 से ₹1,58,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी की कीमत ₹2,35,000 से ₹2,70,000 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई है।

आज के कारोबार में सोने में करीब 1 प्रतिशत और चांदी में लगभग 1.8 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, जिससे बाजार में हल्का उत्साह लौटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट के बाद निवेशक फिर से पोजिशन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या जारी रह सकती है तेजी?

विश्लेषकों के अनुसार हालिया गिरावट ने पिछले साल के बड़े मुनाफे का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से यह गिरावट निवेश का मौका भी हो सकती है। कई मार्केट एक्सपर्ट मानते हैं कि सोना और चांदी अगले 3 से 5 वर्षों के लिए एक संभावित बुल रन में प्रवेश कर सकते हैं।

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वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी को भविष्य की संभावित तेजी के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। यदि ब्याज दरों में नरमी आती है या वैश्विक तनाव बढ़ता है तो कीमती धातुओं में नई तेजी देखने को मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति?

ब्रोकरेज हाउस और वित्तीय सलाहकारों का सुझाव है कि मौजूदा निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोना और चांदी का संतुलित हिस्सा बनाए रखें। अचानक बड़ी खरीदारी करने के बजाय गिरावट के दौरान चरणबद्ध निवेश (SIP या ट्रेंच बेस्ड इन्वेस्टमेंट) को बेहतर रणनीति माना जा रहा है।

इससे जोखिम कम होता है और औसत खरीद मूल्य नियंत्रित रहता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि कुल निवेश पोर्टफोलियो का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा कीमती धातुओं में रखना दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

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वैश्विक संकेतों पर रहेगी नजर

आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve की मौद्रिक नीति, डॉलर इंडेक्स की चाल और वैश्विक महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। यदि डॉलर मजबूत रहता है तो सोने-चांदी पर दबाव बना रह सकता है, जबकि दरों में कटौती या आर्थिक अस्थिरता इन धातुओं को समर्थन दे सकती है। फिलहाल बाजार सतर्क आशावाद के साथ आगे बढ़ रहा है। निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 13 February 2026, 10:08 AM IST

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