Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर भद्रा से कन्फ्यूजन, जानें शिव आराधना और पूजा का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि 2026 पर 15 फरवरी को 12 घंटे भद्रा काल रहेगा। जानें भद्रा का प्रभाव, शिव पूजा और जलाभिषेक का सही मुहूर्त, शुभ योग और व्रत विधि। पूरी जानकारी पढ़ें यहां।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 13 February 2026, 10:45 AM IST
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New Delhi: महाशिवरात्रि 2026 इस बार खास ज्योतिषीय संयोगों के साथ मनाई जाएगी। 15 फरवरी को पड़ने वाली महाशिवरात्रि पर करीब 12 घंटे तक भद्रा काल रहेगा, जिसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है। ऐसे में भक्तों के मन में सवाल है कि भद्रा के दौरान शिव पूजा और जलाभिषेक करना उचित होगा या नहीं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार की स्थिति थोड़ी अलग है और श्रद्धालु बिना किसी चिंता के भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।

कब से कब तक रहेगा भद्रा काल?

पंचांग के अनुसार 15 फरवरी 2026 को भद्रा शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। हालांकि यह भद्रा पाताल लोक की मानी जा रही है। शास्त्रों के अनुसार जब भद्रा पाताल में होती है, तब उसका पृथ्वी पर कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए महाशिवरात्रि पर पूजा, व्रत और अभिषेक करने में कोई बाधा नहीं मानी जा रही।

शिव पूजन और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि के दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

सुबह के शुभ मुहूर्त:

  • चर: सुबह 8:24 से 9:48
  • लाभ: सुबह 9:48 से 11:11
  • अमृत: सुबह 11:11 से दोपहर 12:35

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शाम और रात्रि के मुहूर्त:

  • शुभ: शाम 6:11 से 7:47
  • अमृत: शाम 7:47 से 9:23
  • चर: रात 9:23 से 10:59

इन मुहूर्तों में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और जल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करना विशेष पुण्यदायी माना गया है।

दुर्लभ योगों का बन रहा संयोग

महाशिवरात्रि 2026 पर कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। इनमें शिव योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात और शोभन योग शामिल हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन साधना, तप और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद अनुकूल माना जा रहा है।

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पूजा विधि और व्रत का महत्व

महाशिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। दिनभर भगवान शिव का ध्यान करें और यथासंभव मौन साधना का पालन करें। शाम को मंदिर जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  • शिवलिंग पर गंगाजल और कच्चा दूध अर्पित करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, चंदन और अक्षत चढ़ाएं।
  • कम से कम 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
  • संभव हो तो निर्जल व्रत रखें।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

महाशिवरात्रि को आत्मशुद्धि और साधना की रात्रि माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन की चार प्रहर की पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व नकारात्मकता के नाश और सकारात्मक ऊर्जा के जागरण का प्रतीक है। भद्रा काल के बावजूद इस बार की महाशिवरात्रि भक्तों के लिए शुभ और फलदायी मानी जा रही है। श्रद्धा, नियम और सही मुहूर्त में की गई पूजा से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 13 February 2026, 10:45 AM IST

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