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12 फरवरी 2026 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने राष्ट्रव्यापी भारत बंद का आह्वान किया है। हड़ताल के चलते कई राज्यों में बैंकिंग, बाजार, सार्वजनिक परिवहन और सरकारी कार्यालयों पर असर पड़ सकता है। हालांकि अस्पताल, हवाई अड्डे और अन्य आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होने की संभावना है। आम लोगों को जरूरी काम पहले निपटाने और यात्रा से पहले स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
भारत बंद का ऐलान
New Delhi: देश की ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने कल 12 फरवरी गुरूवार को भारत बंद का ऐलान किया है। भारत बंद का असर देश के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। प्रमुख शहरों में बाजार और दुकानें बंद रह सकती हैं। इसके साथ ही यातायात भी प्रभावित रह सकता है। कई क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सरकारी कार्यालय भी प्रभावित हो सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां प्रदर्शन और रैलियां अधिक होंगी।
यह आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने मिलकर किया है। यूनियनों का दावा है कि इस आंदोलन में करीब 30 करोड़ मजदूर और किसान भाग ले सकते हैं। हड़ताल का असर अलग-अलग राज्यों में अलग स्तर पर देखने को मिल सकता है।
सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। सड़क अवरोध और प्रदर्शन के कारण बस सेवाएं बाधित हो सकती हैं और कुछ स्थानों पर जाम की स्थिति बन सकती है। स्कूल और कॉलेजों के भी बंद रहने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अंतिम निर्णय स्थानीय प्रशासन और संस्थानों पर निर्भर करेगा। वहीं, अस्पताल और अन्य चिकित्सा सेवाएं सामान्य रूप से खुली रहने की संभावना है। हवाई अड्डे, एटीएम, निजी कार्यालय और अन्य आवश्यक सेवाएं भी अधिकांश स्थानों पर संचालित रह सकती हैं।
भारत बंद का असर बैंकिंग सेवाओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि 12 फरवरी को बैंकों की आधिकारिक छुट्टी नहीं है, लेकिन कई बैंक कर्मचारी यूनियनों जैसे AIBEA, AIBOA और BEFI ने हड़ताल का समर्थन किया है। ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और अन्य सेवाओं में देरी संभव है। एटीएम सेवाएं चालू रहने की संभावना है, लेकिन कुछ स्थानों पर कैश की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि जरूरी लेन-देन पहले ही निपटा लें।
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने इस हड़ताल के पीछे कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें चारों श्रम संहिताओं को निरस्त करने, बीज विधेयक वापस लेने, मनरेगा कानून को मजबूत करने और सरकारी रिक्त पदों को भरने की मांग शामिल है। यूनियनों का आरोप है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अनदेखी कर रही है। उनका कहना है कि कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आम जनता और श्रमिक वर्ग प्रभावित हो रहा है।
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भारत बंद के कारण आम लोगों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे जरूरी बैंकिंग कार्य और नकद निकासी पहले ही कर लें। यदि यात्रा जरूरी हो, तो घर से निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन या परिवहन सेवाओं की स्थिति की जानकारी अवश्य लें। अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने से पहले संबंधित संस्थान से संपर्क करके पुष्टि कर लें और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो।