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हत्या के सदमे के बीच सिस्टम की मार (Img- Dynamite News)
Haldwani: मॉडलिंग का सपना देखने वाली 18 साल की कांति झा की गुरुवार को रामनगर हाईवे किनारे खून से लथपथ लाश मिली। सिर में गोली लगने के अंदेशे के कारण पुलिस ने डॉक्टर के पैनल से पोस्टमार्टम कराने का फैसला किया और शव को हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज भेजा। लेकिन गम में डूबे परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि असली मानसिक प्रताड़ना तो अब शुरू होने वाली थी।
शुक्रवार सुबह जब पोस्टमार्टम होना था, तो मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने सिर्फ इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि फाइल में अस्पताल की एक मामूली 'ओपीडी पर्ची' गायब थी। परिजनों ने मिन्नतें कीं कि कागज व्हाट्सएप पर मंगवा लीजिए, लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। नतीजे के तौर पर शव को दोबारा हल्द्वानी से 85 किमी दूर काशीपुर लाया गया, कागजी औपचारिकता पूरी की गई और फिर वापस 85 किमी दूर हल्द्वानी ले जाया गया।
इस पूरी कवायद में काशीपुर अस्पताल के सीएमएस ने इसे 'अनजाने में हुई चूक' मानकर पल्ला झाड़ लिया, तो वहीं पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने जानबूझकर कागजों में जबरन कमी निकालकर पोस्टमार्टम अटकाया। अफसरों की इस आपसी खींचतान और कागजी जिद में बेटी खो चुके पिता और मां को दिनभर एम्बुलेंस के साथ सड़कों पर धक्के खाने पड़े।
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दिनभर की इस भागदौड़ के बाद शाम 6:30 बजे जैसे-तैसे पोस्टमार्टम हो सका। इसके बाद जब शव घर पहुंचा, तो रात हो चुकी थी। ढेला नदी किनारे श्मशान घाट पर रात 11 बजे रोते-बिलखते पिता बच्ची झा ने अपनी मासूम बेटी को मुखाग्नि दी। सिस्टम की इस संवेदनहीनता ने परिजनों के जख्मों पर राहत की जगह और नमक छिड़कने का काम किया।
Location : Haldwani
Published : 22 August 2026, 11:02 AM IST