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Nainital: हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को लेकर नैनीताल जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रस्ताव के विरोध में आयोजित आम सभा में अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट को नैनीताल से बाहर ले जाने का पुरजोर विरोध किया और आगे की रणनीति पर मंथन किया।
बैठक में पूर्व अध्यक्ष ओंकार गोस्वामी ने कहा कि आंदोलन शुरू करने से पहले सभी सहयोगी बार एसोसिएशनों और अधिवक्ताओं से बातचीत कर रणनीति तैयार की जानी चाहिए। पूर्व अध्यक्ष नीरज साह ने मामले को कानूनी तरीके से उठाने पर जोर दिया, जबकि पूर्व अध्यक्ष मनीष मोहन जोशी ने जरूरत पड़ने पर आंदोलन शुरू करने की बात कही।
उप सचिव नीरज गोस्वामी ने कहा कि उत्तराखंड का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा पर्वतीय है, लेकिन राज्य के अधिकांश बड़े संस्थान तराई क्षेत्र में स्थापित हैं। ऐसे में हाईकोर्ट को भी तराई में ले जाने से पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन और बढ़ सकता है।
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पूर्व अध्यक्ष भगवत प्रसाद ने कहा कि देश में किसी स्थापित हाईकोर्ट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का उदाहरण नहीं है। उन्होंने हाईकोर्ट को नैनीताल में ही बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आम सभा में तरुण चंद्रा, मनीष कांडपाल, अशोक मौलेखी, सोहन तिवारी, रचित तिवारी, भानू प्रताप सिंह मौनी, नवीन पंत, संध्या शर्मा, कैलाश जोशी और जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील शर्मा समेत कई अधिवक्ताओं ने भी प्रस्ताव का विरोध किया।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष अरुण बिष्ट ने कहा कि एसोसिएशन पर्वतीय क्षेत्र के हितों के साथ खड़ी है। हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध में आगे की रणनीति सभी बार एसोसिएशनों से बातचीत के बाद तय की जाएगी। सभा का संचालन सचिव संजय सुयाल ने किया।
इस दौरान उपाध्यक्ष कमल चिलवाल, कार्यकारिणी सदस्य निर्मल कुमार, बिलाल अहमद, तारा आर्या, सरिता बिष्ट, मान सिंह बिष्ट, सुनील बिष्ट, हेमा शर्मा और पूजा साह समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
Location : Nainital
Published : 21 August 2026, 5:34 AM IST