हिंदी
बदायूं में गंदे पानी से बजबजाती गलियां
Budaun: जनपद के म्याऊ, विकास खंड में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच ग्राम पंचायत रूपामई उर्फ रामनगर उर्फ रमनगला की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। यहां पिछले कई महीनों से गलियों में नाली का गंदा पानी भरा हुआ है। बारिश के मौसम में यह पानी और बढ़ गया है, जिससे न सिर्फ आने-जाने में दिक्कत हो रही है, बल्कि बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी गंदे पानी के बीच से होकर स्कूली बच्चों को रोजाना स्कूल जाना पड़ रहा है। बुधवार को भी कुछ बच्चे बस्तों को हाथ में उठाकर घुटनों तक भरे पानी में से गुजरते दिखे। ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन यहां फिसलकर गिरने और बीमार पड़ने की घटनाएं हो रही हैं।
ग्रामवासियों का आरोप है कि पिछले 5 साल में पंचायत में न तो नालियों का निर्माण हुआ, न ही गलियों की मरम्मत कराई गई। प्रधान द्वारा विकास के जो दावे किए जाते हैं, जमीनी हकीकत उसके उलट है। गलियों में भरा यह गंदा पानी ही पंचायत में हुए तथाकथित विकास की सबसे बड़ी मिसाल बन गया है।
इस पूरे मामले की जानकारी जब दूरभाष पर ग्राम प्रधान किशोरी लाल उर्फ कृष्ण कुमार से ली गई, तो उन्होंने समस्या से साफ इनकार कर दिया। प्रधान ने कहा, "हमारे गांव में किसी भी गली में कीचड़ या गंदा पानी नहीं भरा हुआ है लेकिन मौके की तस्वीरें प्रधान के इस बयान के ठीक उलट हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि गलियों में सड़ांध मारता पानी भरा है और बच्चे उसी में से निकलने को मजबूर हैं।
परेशान ग्रामीणों ने कई बार इस समस्या को लेकर खंड विकास अधिकारी, म्याऊ को लिखित और मौखिक शिकायत दी है। इसके बावजूद अब तक न तो नालियों की सफाई कराई गई है, न ही नई नाली और सड़क बनवाई गई है।
स्थानीय निवासी रामपाल ने बताया, "बारिश में तो घरों में भी पानी घुस जाता है। मच्छर और बदबू की वजह से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। प्रधान जी कहते हैं सब ठीक है, तो फिर यह पानी किसका है?" एक अन्य ग्रामीण ने कहा, "5 साल हो गए वोट दिए हुए। हर बार विकास का वादा होता है, लेकिन आज भी हम कीचड़ में जीने को मजबूर हैं।"
खबर लिखे जाने तक खंड विकास अधिकारी या जिला पंचायत राज अधिकारी का कोई पक्ष सामने नहीं आया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पंचायत में नालियों का निर्माण और गलियों में रोड डलवाकर समस्या का समाधान कराया जाए।
अब देखना यह होगा कि स्कूली बच्चों की मजबूरी और बीमारियों के बीच डूबी इस पंचायत की सुध प्रशासन कब लेता है। वरना "स्वच्छ भारत" और "विकसित गांव" के नारे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।
Location : Budaun
Published : 20 August 2026, 11:07 PM IST