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पशुपालन में रुचि दिखा रहे युवा
Pauri Garhwal: उत्तराखंड के युवा अब रोजगार के लिए पशुपालन की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार के लिए पहाड़ों से मैदान की तरफ जाने वाले लोगों के पलायन पर भी रोक लग रही है।
जानकारी के अनुसार पशुपालन विभाग भी गांव में कई योजनाओं को चला रही है जिसमें बकरी-मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, गौ पालन समेत कई योजनाएं है। जिसका युवा फायदा उठा रहे हैं। इस प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यस्था भी मजबूत हो रही है।
जिला प्रशासन के प्रयासों से भी जनपद में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के मार्गदर्शन में पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को पशुपालन से जोड़कर उनकी आर्थिकी मजबूत की जा रही है। इन योजनाओं से जुड़कर कई ग्रामीण अपने ही गांव में रहकर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
जनपद में बकरी पालन, मुर्गी पालन, गौ पालन तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गौ पालन योजना के तहत 143, बकरी पालन योजना में 262, महिला बकरी पालन योजना में 30, मुर्गी पालन में 120, नंदी पालन योजना में 6, गैर-सरकारी गौ सदन में 18 तथा सरकारी गौ सदन में 3 इकाइयों को योजनाओं का लाभ दिया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में जिला योजना के तहत 262 लाभार्थियों को बकरी पालन योजना से जोड़ा गया है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को 16 बकरियां उपलब्ध करायी जाती हैं, जिससे वे व्यवस्थित रूप से बकरी पालन कर अपनी आय बढ़ा सकें।
उन्होंने बताया कि महिला बकरी पालन योजना के तहत 30 विधवा महिलाओं को चार-चार बकरियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे वे अपने घर के पास ही पशुपालन कर आत्मनिर्भर बन सकें और उनकी आजीविका मजबूत हो सके।
डॉ. शर्मा ने बताया कि मुर्गी पालन योजना के अंतर्गत 120 लाभार्थियों को तीन-तीन हजार मुर्गियां उपलब्ध कराई गई हैं। इनसे उत्पादित मुर्गियां और बकरियों की आपूर्ति सीमा सुरक्षा बल श्रीनगर को भी की जाती है, जिससे लाभार्थियों को बाजार उपलब्ध हो रहा है और उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है।
उन्होंने बताया कि नंदी पालन योजना के तहत छह लाभार्थी पांच-पांच नंदियों का पालन कर रहे हैं। इनके भरण-पोषण के लिए सरकार की ओर से प्रति नंदी प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता दी जाती है। इसके अलावा जनपद में 18 गैर-सरकारी गौ सदन संचालित किए जा रहे हैं, जिनके संचालन के लिए भी प्रति गाय प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद के श्रीनगर, सतपुली और कोटद्वार में तीन सरकारी गौ सदन भी संचालित हैं। इनकी देखरेख करने वाले कार्मिकों को भी प्रति गाय प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक ग्रामीणों को पशुपालन से जोड़कर उन्हें स्थायी स्वरोजगार उपलब्ध कराया जाए। जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में विभाग लगातार योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
Location : Pauri Garhwal
Published : 7 March 2026, 8:32 PM IST
Topics : Animal Husbandry employment Pauri Garhwal youth