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महिलाओं का अनोखा कारनामा (Img: Dynamite News)
Nainital: नैनीताल के पहाड़ों में इन दिनों एक खामोश लेकिन असरदार कहानी लिखी जा रही है। यह कहानी है उन महिलाओं की, जिन्होंने जंगलों में बिखरी चीड़ की सूखी पत्तियों यानी पीरुल को सिर्फ खतरे के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसे अपने संघर्ष और समाधान दोनों का हिस्सा बना लिया।
गर्मी का मौसम आते ही पहाड़ों के जंगलों में आग का डर हमेशा मंडराता रहता है। ऐसे में यही पीरुल आग को तेजी से फैलाने का काम करता है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं लगातार जंगलों में जाकर इस पीरुल को इकट्ठा कर रही हैं। अब तक 2357 क्विंटल पीरुल संग्रह किया जा चुका है और यह काम अभी भी थमा नहीं है।
ओखलकांडा, रामगढ़, धारी, बेतालघाट, भीमताल और कोटाबाग के गांवों में महिलाएं सुबह से ही जंगलों की ओर निकल पड़ती हैं। उनके हाथों में टोकरी होती है और मन में एक जिम्मेदारी अपने जंगलों को बचाने की। यह काम सिर्फ मेहनत का नहीं, बल्कि एक समझ और जागरूकता का भी है, जहां वे यह जानती हैं कि आज का यह छोटा प्रयास आने वाले दिनों में बड़ी तबाही को रोक सकता है।
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इस पहल की खास बात यह है कि इससे महिलाओं की जिंदगी में आर्थिक सहारा भी जुड़ गया है। वे इकट्ठा किया गया पीरुल वन विभाग और निजी संस्थानों को देकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। यानी जो चीज कभी जंगलों के लिए खतरा थी, वही अब इन महिलाओं के लिए अवसर बन गई है।
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यह कहानी सिर्फ पीरुल इकट्ठा करने की नहीं है, बल्कि उस सोच की है जहां पहाड़ की महिलाएं अपने पर्यावरण और अपने भविष्य दोनों को साथ लेकर चल रही हैं। उनकी यह कोशिश बताती है कि बदलाव बड़े कदमों से नहीं, बल्कि ऐसे छोटे छोटे प्रयासों से ही शुरू होता है।
Location : Nainital
Published : 25 April 2026, 3:31 PM IST
Topics : Haridwar News Nainital News Uttarakhand News