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नैनीताल के कैंची धाम और आसपास के पूरे क्षेत्र को प्राधिकरण के दायरे में लाए जाने के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण और अनियोजित विकास पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए एसटीपी निर्माण, सफाई व्यवस्था और भवन उपनियमों के उल्लंघन पर कड़ा पहरा लगाया गया है।
कैंची धाम में नहीं चलेगी नियमों की अनदेखी
Nainital: नैनीताल जिले के प्रसिद्ध कैंची धाम और उसके आसपास के पूरे इलाके को जिला विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल किए जाने के बाद प्रशासन ने यहां तेजी से फैल रहे अव्यवस्थित निर्माण पर सख्ती शुरू कर दी है। पिछले वर्ष 8 अगस्त 2024 को जारी अधिसूचना के बाद यह क्षेत्र पूरी तरह प्राधिकरण के दायरे में आ गया था, जिसके बाद किसी भी नए भवन का नक्शा पास करने का अधिकार केवल प्राधिकरण के पास रह गया।
एनजीटी में लंबित याचिका को देखते हुए जिलाधिकारी ने हाल ही में बैठक बुलाकर सीडियो नैनीताल और संबंधित विभागों को साफ निर्देश दिए कि कैंची धाम में हो रहे एसटीपी निर्माण, सफाई व्यवस्था, निर्माण गतिविधियों और अवैध ढांचों की निगरानी तेज की जाए। लगातार बढ़ते श्रद्धालु प्रवाह के चलते सीवरेज दबाव को ध्यान में रखकर पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता को नया एसटीपी प्रस्ताव तत्काल तैयार करने का आदेश दिया गया है, ताकि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वैज्ञानिक समाधान लागू किया जा सके।
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इधर प्राधिकरण ने भवन उपनियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई शुरू करते हुए अब तक 90 लोगों को नोटिस भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना स्वीकृति के बने निर्माण धाम क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और सुरक्षित विकास के लिए खतरा बन रहे हैं, इसलिए आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती आमद का असर क्षेत्र की जमीन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। यहां जमीन की खरीद-फरोख्त इतने तेज़ी से बढ़ी कि होटल, रिसॉर्ट और कई व्यावसायिक इमारतें तेजी से खड़ी होती चली गईं। कई स्थानों पर निर्माण नियमों के विपरीत ढांचे बनते पाए गए, जिससे क्षेत्र में अव्यवस्थित विस्तार की स्थिति और गंभीर हो गई। इसी अव्यवस्था को रोकने के लिए प्राधिकरण ने क्षेत्र में दो अभियंताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है, जो लगातार निरीक्षण कर नियमों का उल्लंघन रोकने में जुटे हैं।
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प्रशासन का कहना है कि कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखते हुए विकास को अब योजनाबद्ध दिशा में ले जाया जाएगा। उद्देश्य है कि धाम क्षेत्र सुरक्षित, व्यवस्थित और बेहतर सुविधाओं से लैस बने, ताकि आने वाले वर्षों में यहां का विकास धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय संतुलन दोनों के अनुरूप आगे बढ़ सके।