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अंकिता भंडारी मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ। उत्तराखंड की सामाजिक संस्थाओं ने VIP का नाम सार्वजनिक करने, CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की।
जंतर-मंतर पर उत्तराखंड की सामाजिक संस्थाओं का धरना
New Delhi: अंकिता भंडारी मामले की गूंज अब देहरादून से निकलकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गई है। उत्तराखंड से जुड़ी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समूहों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए मामले में शामिल कथित VIP का नाम सार्वजनिक करने, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच तथा दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हाथों में तख्तियां लीं, लोकगीत गाए और नारेबाजी के जरिए अपना आक्रोश जाहिर किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई किसी एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से डगमगा रहा है। इसी वजह से उन्होंने जांच को CBI को सौंपने और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग रखी, ताकि किसी भी स्तर पर दबाव या पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
धरना दे रहे एक आंदोलनकारी ने कहा कि उनकी मांग बहुत स्पष्ट है गुनाहगार को फांसी की सजा मिले। उन्होंने कहा कि अंकिता एक साधारण और गरीब परिवार से थी, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए नौकरी कर रही थी। उनका आरोप है कि कथित तौर पर “एस्ट्रा सर्विस” देने से इनकार करने के कारण उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। आंदोलनकारी ने सवाल उठाया कि जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो रात के आठ बजे के बाद लड़कियों को घर से बाहर निकलने में डर लगने लगता है। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े किए।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। उनका कहना था कि जब अपराधियों को राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण मिलता है, तब न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में ऐसे लोग भी हैं जो महिलाओं की सुरक्षा की बातें करते हैं, लेकिन वास्तविकता में अपराधियों को बचाने की कोशिशें होती हैं। इस दोहरे रवैये के खिलाफ लोगों का गुस्सा जंतर-मंतर पर साफ दिखाई दिया।
प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि अंकिता भंडारी मामले में VIP की भूमिका सामने आई है, तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाना चाहिए और उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एक आंदोलनकारी ने कहा, “यह जनता का काम नहीं है कि वह सबूत लाए। जिन संस्थाओं को जांच के लिए बनाया गया है, उनकी जिम्मेदारी है कि वे सच्चाई सामने लाएं।” उन्होंने एक उत्तराखंड मंत्री के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा कि सबूत लाने की बात कहना जिम्मेदारी से बचने जैसा है।
धरने में शामिल महिलाओं ने विशेष तौर पर पहाड़ की बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि उत्तराखंड जैसे शांत माने जाने वाले राज्य में ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं। उन्होंने मांग की कि न केवल इस मामले में, बल्कि भविष्य में भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि हर बेटी खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
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जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन संदेश साफ था अंकिता भंडारी को इंसाफ चाहिए और दोषियों को सजा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक सच्चाई सामने नहीं आती और न्याय सुनिश्चित नहीं होता।