पाल नहीं सकते तो शादी क्यों? हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, पति की अपील खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आर्थिक जिम्मेदारी निभाने की क्षमता नहीं है तो शादी नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए पत्नी और बच्चों को 4000 रुपये मासिक भरण-पोषण देने के आदेश को बरकरार रखा।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 21 April 2026, 3:36 PM IST
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Prayagraj: पति-पत्नी के बीच भरण-पोषण को लेकर चल रहे एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों का पालन-पोषण नहीं कर सकता, तो उसे शादी ही नहीं करनी चाहिए। आर्थिक तंगी का हवाला देकर जिम्मेदारियों से बचना स्वीकार्य नहीं है।

खंडपीठ ने खारिज की पति की अपील

यह मामला प्रयागराज के परिवार न्यायालय के उस आदेश से जुड़ा था, जिसमें पत्नी और बच्चों के पक्ष में 4000 रुपये प्रति माह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए पति हाईकोर्ट पहुंचा था। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने पति की अपील को सिरे से खारिज कर दिया और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।

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“आर्थिक तंगी बहाना नहीं बन सकती”

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि शादी के बाद पति अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता। आर्थिक तंगी का हवाला देकर पत्नी और बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि मौजूदा महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए 4000 रुपये की राशि किसी भी दृष्टिकोण से ज्यादा नहीं मानी जा सकती।

पति की दलीलें कोर्ट ने की खारिज

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पति ने अपनी अपील में कहा था कि वह एक मजदूर है और उसकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह हर महीने 4000 रुपये दे सके। साथ ही उसने एक हलफनामा पेश कर पत्नी पर अवैध संबंधों का आरोप भी लगाया। हालांकि कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि पति ने कम पढ़ी-लिखी पत्नी से धोखे से हलफनामे पर हस्ताक्षर करवाए थे, जो न्यायिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।

Location :  Prayagraj

Published :  21 April 2026, 3:36 PM IST

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