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नदी में समा गईं पीढ़ियों की यादें (Img: Dynamite News)
Deoria: बरहज में घाघरा (सरयू) और राप्ती नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने के साथ तटीय क्षेत्रों में कटान भी भयावह रूप लेती जा रही है। वर्षों से बाढ़ और नदी की विनाशकारी कटान झेल रहा देवरिया जिले का कुरह परसिया गांव अब पूरी तरह इतिहास बन चुका है। कभी करीब 500 से अधिक परिवारों की आबादी वाला यह गांव आज घाघरा नदी में पूरी तरह समा चुका है।
कभी सरयू (घाघरा) के किनारे आबाद कुरह परसिया गांव में लोगों के घर, खेत, स्कूल और जीवन की तमाम यादें थीं। लेकिन लगातार होती कटान ने धीरे-धीरे पूरे गांव को निगल लिया। अब हालात ऐसे हैं कि गांव का एक भी मकान शेष नहीं बचा और कुरह परसिया का नाम केवल सरकारी अभिलेखों और लोगों की यादों तक सीमित रह गया है।
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गांव के उजड़ने के बाद अधिकांश परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ लोगों ने आसपास के गांवों में नया ठिकाना बनाया, जबकि कई परिवार देवरिया, गोरखपुर और अन्य शहरों में बस गए। विस्थापित परिवार आज भी अपने पुराने गांव और जीवन को याद कर भावुक हो उठते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष आने वाली बाढ़ और तेज कटान ने उनकी जमीन, मकान और वर्षों की मेहनत को नदी में समा दिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कटानरोधी कार्य और बाढ़ सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो शायद गांव का अस्तित्व बचाया जा सकता था।
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वर्तमान में भी घाघरा और राप्ती किनारे बसे कई गांव कटान के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी कटानरोधी परियोजनाएं शुरू की जाएं, ताकि भविष्य में किसी अन्य गांव को कुरह परसिया जैसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
Location : Deoria
Published : 6 August 2026, 4:39 PM IST
Topics : Barhaj Deoria News Flood News UP News