जहां खिलखिलाता था बचपन, वहां आज सिर्फ बह रही है सरयू; देवरिया का यह गांव नदी में विलीन, उजड़ गईं 500 जिंदगियां

देवरिया जिले के बरहज में घाघरा (सरयू) नदी की भयावह कटान ने पूरे 'कुरह परसिया' गांव को निगल लिया। कभी 500 से अधिक परिवारों की आबादी वाला यह गांव अब पूरी तरह नदी में समाकर इतिहास बन चुका है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 6 August 2026, 4:39 PM IST
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Deoria: बरहज में घाघरा (सरयू) और राप्ती नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने के साथ तटीय क्षेत्रों में कटान भी भयावह रूप लेती जा रही है। वर्षों से बाढ़ और नदी की विनाशकारी कटान झेल रहा देवरिया जिले का कुरह परसिया गांव अब पूरी तरह इतिहास बन चुका है। कभी करीब 500 से अधिक परिवारों की आबादी वाला यह गांव आज घाघरा नदी में पूरी तरह समा चुका है।

कभी आबाद था गांव, अब सिर्फ यादों में बचा कुरह परसिया

कभी सरयू (घाघरा) के किनारे आबाद कुरह परसिया गांव में लोगों के घर, खेत, स्कूल और जीवन की तमाम यादें थीं। लेकिन लगातार होती कटान ने धीरे-धीरे पूरे गांव को निगल लिया। अब हालात ऐसे हैं कि गांव का एक भी मकान शेष नहीं बचा और कुरह परसिया का नाम केवल सरकारी अभिलेखों और लोगों की यादों तक सीमित रह गया है।

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मजबूरी में करना पड़ा पलायन

गांव के उजड़ने के बाद अधिकांश परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ लोगों ने आसपास के गांवों में नया ठिकाना बनाया, जबकि कई परिवार देवरिया, गोरखपुर और अन्य शहरों में बस गए। विस्थापित परिवार आज भी अपने पुराने गांव और जीवन को याद कर भावुक हो उठते हैं।

ग्रामीणों का दर्द - समय रहते कदम उठते तो...  

ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष आने वाली बाढ़ और तेज कटान ने उनकी जमीन, मकान और वर्षों की मेहनत को नदी में समा दिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कटानरोधी कार्य और बाढ़ सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो शायद गांव का अस्तित्व बचाया जा सकता था।

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कई गांवों पर मंडरा रहा खतरा

वर्तमान में भी घाघरा और राप्ती किनारे बसे कई गांव कटान के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी कटानरोधी परियोजनाएं शुरू की जाएं, ताकि भविष्य में किसी अन्य गांव को कुरह परसिया जैसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

Location :  Deoria

Published :  6 August 2026, 4:39 PM IST

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