अब साबुन और टूथपेस्ट पर भी दिखेगा वेज-नॉनवेज का लाल-हरा मार्क, क्या बदला सरकार का नया नियम?

केंद्र सरकार के नए नियम के तहत अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक्स पैकेट पर भी वेज-नॉनवेज का लाल-हरा निशान मिलेगा। 21 सितंबर से लागू इस प्रावधान से लंबी इंग्रेडिएंट्स लिस्ट पढ़ने की झंझट खत्म होगी और मुख्य डिस्प्ले पर स्पष्ट पहचान दिखेगी।

Updated : 23 September 2026, 9:17 AM IST
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New Delhi: अब तक चिप्स के पैकेट या बिस्कुट के डिब्बों पर हरी या लाल बिंदी खोजकर यह तय करने की आदत रही है कि चीज शाकाहारी है या मांसाहारी। लेकिन अब यह माथापच्ची बाथरूम की शेल्फ तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार के नए आदेश के बाद अब नहाने का साबुन, बाल धोने का शैंपू, दांत चमकाने वाला टूथपेस्ट और चेहरे पर लगाने वाले कॉस्मेटिक्स भी इसी लाल-हरे दायरे में आ गए हैं।

क्या बदला है कानूनी प्रावधान?

सरकार ने कंज्यूमर प्रोटेक्टिव पारदर्शिता को बढ़ाते हुए लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 में अहम संशोधन किए हैं।

नई अनिवार्यता: अब तक यह नियम सिर्फ खाने-पीने की चीजों (फूड आइटम्स) पर लागू था।

नया दायरा: रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले पर्सनल केयर और नॉन-फूड प्रोडक्ट्स को भी इसके तहत शामिल कर लिया गया है।

असर: 21 सितंबर से यह प्रावधान प्रभावी हो चुका है, जिससे मैन्युफैक्चरर्स को अपनी पैकेजिंग बदलनी होगी।

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कैसे पहचानेंगे असली और नकली (वेज/नॉनवेज)?

केमिकल के मुश्किल और लंबे नामों (इंग्रेडिएंट्स लिस्ट) को पढ़ने का झंझट हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है।

हरा मार्क (Green Dot): पूरी तरह शाकाहारी और प्लांट-बेस्ड या सेफ डिराइव्ड सामग्री।

लाल या भूरा मार्क (Red/Brown Dot): ऐसे उत्पाद जिनमें एनिमल-डिराइव्ड (पशुओं से प्राप्त) तत्व शामिल हैं।

फायदा: ग्राहक रत्तीभर भी भ्रम में नहीं रहेगा; डिब्बा उठाते ही पहली नजर में सच सामने होगा।

कहां मिलेगा यह खास निशान?

मार्केटिंग और पैकेजिंग डिजाइन के पुराने तौर-तरीकों को दरकिनार करते हुए सरकार ने इसकी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है।

मुख्य स्थान: यह निशान मेन डिस्प्ले पैनल (PDP) के ठीक ऊपर या सबसे प्रमुख हिस्से पर होगा।

छिपाव की गुंजाइश नहीं: बैक साइड या छोटे फॉन्ट में लिखे कोनों-खुरदुरों से अब कंपनियां बच नहीं सकेंगी।

किन-किन उत्पादों पर गिरेगी ‘नजर’?

आपके घर के ग्रॉसरी बैग और बाथरूम किट में रखे इन सामानों पर यह नियम सीधे असर डालेगा-

नहाने और धोने वाले साबुन (Soaps)

बालों की सेहत संभालने वाले शैंपू (Shampoos)

सुबह-सुबह इस्तेमाल होने वाले टूथपेस्ट (Toothpastes)

स्किनकेयर और ब्यूटी कॉस्मेटिक्स (Cosmetics)

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क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

शाकाहारी या विशेष जीवनशैली (Vegan/Vegetarian lifestyle) अपनाने वाले उपभोक्ता लंबे समय से मांग कर रहे थे कि ग्लिसरीन, फैटी एसिड या अन्य एनिमल-ओरिजिनेटेड एडिटिव्स जो इन कॉस्मेटिक्स या सोप में छिपे होते हैं, उनकी स्पष्ट जानकारी मिले।

अब तक खरीदार को अंग्रेजी के जटिल केमिकल नाम गूगल करने पड़ते थे या यह मानकर चलना पड़ता था कि जो चमक रहा है वो साफ है। सरकार के इस कदम से पारदर्शिता का स्तर ऊंचा उठा है और कॉरपोरेट कंपनियों के लिए डिस्क्लोजर नॉर्म्स सख्त हो गए हैं।

क्या होगा आगे?

आने वाले दिनों में जैसे-जैसे पुराना स्टॉक बाजार से हटेगा, नई पैकेजिंग वाले शेल्फ नजर आएंगे। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो अपनी वैल्यूज के हिसाब से पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स चुनना चाहते हैं-बिना किसी लैब-ग्रेड रिसर्च के।

Location :  New Delhi

Published :  23 September 2026, 9:17 AM IST

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