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गोरखपुर के खजनी थाना क्षेत्र स्थित महुआडाबर चौकी एक बार फिर चर्चा में है। चौकी प्रभारी के स्थानांतरण के बाद करीब पांच दिनों तक चौकी खाली रहने से क्षेत्र में चोरी की घटनाएं सामने आईं। इसी दौरान चोरी की स्टेपनी और अन्य सामान की बरामदगी हुई। ग्रामीणों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा…
महुआडाबर चौकी
Gorakhpur: गोरखपुर जिले के खजनी थाना क्षेत्र अंतर्गत महुआडाबर चौकी हाल के दिनों में कानून-व्यवस्था को लेकर सुर्खियों में आ गई है। सूर्य बिहार चौकी से अर्जुन पटेल का स्थानांतरण कर उन्हें महुआडाबर चौकी भेजा गया, जबकि यहां के चौकी इंचार्ज रहे अभिषेक सिंह को तिवारीपुर थाना क्षेत्र के जाफरा बाजार चौकी स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद महुआडाबर चौकी करीब पांच दिनों तक प्रभारी विहीन रही।
इस अवधि में न तो नियमित गश्त दिखी और न ही निगरानी व्यवस्था सक्रिय नजर आई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बीच स्थित चौकी का इस तरह खाली रहना अपने आप में खतरे का संकेत है। पांच दिन बाद बुधवार को नबागत चौकी इंचार्ज अर्जुन पटेल ने खजनी थाने में आमद कर महुआडाबर चौकी का कार्यभार संभाला, लेकिन तब तक हालात कई सवाल खड़े कर चुके थे।
चौकी प्रभारी के न होने के दौरान महुआडाबर में सक्रिय चोर गिरोह की गतिविधियां उजागर हुईं। गांव में एक दाह संस्कार कार्यक्रम में पहुंचे मैजिक लोडर वाहन में लगी स्टेपनी को उसके असली स्वामी ने पहचान लिया। इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने मिनी लोडर वाहन को थाने लाकर जांच की, जहां चोरी की स्टेपनी के साथ अन्य सामान भी बरामद किया गया।
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पूछताछ के दौरान वाहन चालक ने बताया कि उसने कंदराई निवासी अखिलेश यादव से टायर, रिम, जैक समेत अन्य सामान मात्र एक हजार रुपये में खरीदा था। जब पुलिस कथित खरीदार तक पहुंची तो वह फरार मिला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभारी अधिकारी की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर चोरी के माल की खरीद-फरोख्त करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी।
ग्रामीणों के अनुसार महुआडाबर क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोटर, स्टेपनी, लोहे की सामग्री, बैटरी और अन्य सामानों की चोरी अब आम हो चुकी है। निगरानी की कमी और लापरवाही के कारण चोर बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। खजनी थाना मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित महुआडाबर का आपराधिक इतिहास भी पुराना और गंभीर रहा है।
अतीत में यहां संगीन अपराधों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे क्षेत्र की छवि लंबे समय तक दहशत से जुड़ी रही। हालात को देखते हुए पुलिस को यहां चौकी स्थापित करनी पड़ी, लेकिन वर्षों बाद भी चौकी गांव के एक भवन में ही संचालित हो रही है। स्थायी भवन अब तक नहीं बन सका है।
अब नए चौकी प्रभारी अर्जुन पटेल के कार्यभार संभालने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि नियमित गश्त, त्वरित कार्रवाई और चोरी के नेटवर्क पर सख्ती की जाएगी। सवाल यही है कि क्या प्रशासन महुआडाबर में कानून-व्यवस्था को मजबूत कर पाएगा या लापरवाही एक बार फिर इलाके की शांति के लिए खतरा बनेगी।