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फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने सघन चेकिंग के दौरान 148 जीवित कछुओं के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया। कछुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 40 लाख रुपये बताई जा रही है। दोनों आरोपी ट्रेन से तस्करी की फिराक में थे।
रेलवे से हो रही थी वन्यजीव तस्करी
Fatehpur: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर चल रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। आरपीएफ टीम ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 148 जीवित कछुओं के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। बरामद कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 40 लाख रुपये बताई जा रही है।
आरपीएफ कमांडर राजिंदर कुमार ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी आपस में जीजा-साले हैं। इनमें से एक की पहचान उमेश कंजड़ निवासी महेसुवा, थाना हनुमानगंज, जिला सुल्तानपुर के रूप में हुई है। दोनों आरोपी रेलवे स्टेशन पर बोरे और बैग लेकर घूम रहे थे, जिसे देखकर आरपीएफ टीम को संदेह हुआ।
आरपीएफ कर्मियों ने जब संदिग्धों के बोरे और बैग की तलाशी ली तो उसके अंदर से 148 जीवित कछुए बरामद किए गए। कछुओं को बेहद अमानवीय तरीके से बोरे में भरकर ले जाया जा रहा था। मौके पर ही दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया और उनसे पूछताछ शुरू की गई।
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पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे सुल्तानपुर से बस के जरिए फतेहपुर पहुंचे थे और यहां से ट्रेन के माध्यम से कछुओं को पश्चिम बंगाल ले जाने की योजना बना रहे थे। आरपीएफ के अनुसार, आरोपी लंबे समय से बस और ट्रेन के जरिए कछुओं की तस्करी कर रहे थे।
कछुओं की तस्करी
आरपीएफ अधिकारियों के मुताबिक तस्कर एक कछुए को 300 से 400 रुपये में बेचते थे, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत कई गुना अधिक होती है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस तस्करी के पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसकी कड़ियां अन्य राज्यों से भी जुड़ी हो सकती हैं।
मामले की जानकारी तुरंत वन विभाग को दे दी गई है। वन विभाग की टीम बरामद कछुओं को सुरक्षित संरक्षण में लेने की प्रक्रिया में जुट गई है। दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले ट्रेन के जरिए कछुओं की तस्करी की एक खेप फतेहपुर रेलवे स्टेशन से निकल गई थी, जिसे बाद में प्रयागराज में आरपीएफ ने पकड़ा था। उसी घटना के बाद फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर चेकिंग अभियान को और अधिक सख्त किया गया था। मौजूदा कार्रवाई को उसी अभियान का बड़ा परिणाम माना जा रहा है।
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आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि रेलवे के माध्यम से वन्यजीव तस्करी पर रोक लगाने के लिए चेकिंग अभियान आगे भी जारी रहेगा। संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।