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सोनभद्र में फॉर्म 7 के जरिए मतदाता सूची से 12 जीवित मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास पकड़ा गया। बीएलओ नितेश कुमार ने सत्यापन किया, सपा ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कार्रवाई की मांग की।
वोटरों के नामों को लेकर उठा सवाल (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Sonbhadra: सदर विधानसभा के पूर्व मोहल्ला और दलित बस्ती क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण के दौरान मतदाता सूची से फर्जी तरीके से नाम हटाने का मामला सामने आया है। स्थानीय बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) ने इस मामले की शिकायत मिलने पर स्थल पर जाकर सत्यापन किया और पाया कि कई आपत्तियां झूठी थीं।
मिली जानकारी के अनुसार कुल 14 नामों को मतदाता सूची से हटाने के लिए प्रारूप 7 (फॉर्म 7) में आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इनमें शकीरा सुल्तान के परिवार के सदस्य- पति शाजिद अली और पुत्र आदि अली- के नाम भी शामिल थे। फॉर्म में कारण दिया गया था कि ये लोग या तो इस पते पर नहीं रहते या उनकी मृत्यु हो चुकी है।
शकीरा सुल्तान ने बताया कि उनके परिवार के सभी सदस्य मौके पर उपस्थित थे और बीएलओ ने उनकी उपस्थिति की पुष्टि भी की। वहीं अकबर अली ने चेतावनी दी कि जिस भी राजनीतिक पार्टी के बूथ एजेंट ने उनके नाम कटवाने का प्रयास किया है, उनके खिलाफ वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
सपा के जिला सचिव प्रमोद यादव ने बताया पूरा मामला
बीएलओ नितेश कुमार ने बताया कि प्रारूप 7 में आपत्तियां दर्ज हुईं कि संबंधित पते पर ये सभी लोग निवास नहीं कर रहे। हालांकि, विभाग के निर्देशों के अनुसार बीएलओ को फॉर्म स्वीकार करना होता है, लेकिन बिना पूरी जांच किए कोई नाम सूची से हटाया नहीं जा सकता।
नितेश कुमार ने एपिक नंबर के माध्यम से सभी 14 नामों का सत्यापन किया। इस प्रक्रिया में सपा नेता प्रमोद यादव ने भी सहयोग किया। जांच में सामने आया कि 12 मतदाता अभी भी उसी पते पर निवास कर रहे हैं, जबकि दो मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी। मौके पर उपस्थित जीवित मतदाताओं ने अपने नाम कटाने के प्रयास पर कड़ी आपत्ति जताई।
बीएलओ नितेश कुमार ने स्पष्ट किया कि सत्यापन केवल नामों से नहीं बल्कि एपिक नंबर से किया गया, जिससे जानकारी पूरी तरह सटीक रही। उन्होंने कहा, "जब एपिक नंबर संबंधित व्यक्ति का पाया गया और वह मौके पर उपस्थित था, तो उसे अनुपस्थित कैसे दर्शाया जा सकता है।"
सपा के जिला सचिव प्रमोद यादव ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब बीएलओ वार्ड नंबर-1 के बूथ संख्या 14 में फॉर्म बांट रहे थे। बीएलओ का तर्क था कि कुछ लोग निवास नहीं करते, इसलिए उनके फॉर्म आए हैं। सत्यापन में पता चला कि सभी संबंधित लोग वहां मौजूद और जीवित थे।
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प्रमोद यादव ने इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया, जिसका उद्देश्य विशेष समुदाय के मतदाताओं को परेशान करना है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी जिलाधिकारी को भी दी जा चुकी है।
सपा नेता ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशानुसार, सपा कार्यकर्ता 'पड़ा प्रहरी' के रूप में ऐसे दुरुपयोग पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल के बीएलए को फॉर्म 7 जमा करने का अधिकार नहीं है, और ऐसा करने पर बीएलओ की नौकरी पर भी असर पड़ सकता है।