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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने साफ कहा है कि “पंचायत चुनाव समय पर होंगे, किसी तरह की अफवाह फैलाने की ज़रूरत नहीं है।” ऐसे में इस रिपोर्ट में जानते हैं यूपी पंचायत चुनाव के इतिहास के बारे में
UP में पंचायत चुनाव का इतिहास
Lucknow: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। गांव की गलियारों से लेकर जिला मुख्यालय तक लगातार चर्चा तेजी से हो रही है। चारों और हर तरफ यही सवाल गूंज रहा है कि पंचायत चुनाव कब होंगे और इस बार किसके हाथ लगेगी बाजी? यह जब जानेंगे इस खास रिपोर्ट में लेकिन, इससे पहले जान लेते हैं यूपी में पंचायत चुनाव के इतिहास के बारे में। क्या कहता है यूपी में पंचायत चुनाव का इतिहास?
वर्ष 2026 में होने वाले यूपी पंचायत चुनाव सिर्फ गांवों का प्रधान चुनने के लिए नहीं होता, बल्कि इन्हें आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला पहला बड़ा इम्तिहान माना जाता है। यूपी में पंचायत व्यवस्था कोई नई चीज नहीं है। आजादी के बाद सरकार ने यह समझा कि अगर लोकतंत्र को मजबूत करना है तो उसकी जड़ गांव से मजबूत करनी पड़ेगी। इसी सोच से गांवों में पंचायतों को मजबूती दी गई है।
पंचायतों को संवैधानिक दर्जा संविधान के 73वें संशोधन के बाद मिला है। इसका अर्थ यह है कि अब गांव के लोग सीधा अपना प्रतिनिधि चुन सकते हैं। तभी से उत्तर प्रदेश में लगभग हर पांच साल पर पंचायत चुनाव कराए जाते हैं। यहीं व्यवस्था गांव के आम आदमी को सीधे सत्ता से जोड़ती है।
बता दें कि यूपी में आखिरी पंचायत चुनाव साल 2021 कोविड-19 के बीच चार चरणों में कराए गए थे। इन चुनावों से गांवों में प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) और जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे। बता दें कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 साल का होता है। 2021 में चुनी गई पंचायतों का कार्यकाल अब 2026 में पूरा हो रहा है। ऐसे में पंचायत चुनावों लेकर यूपी में सुगबुगाहट तेज हो गई है। जिसके चलते ही राज्य निर्वाचन आयोग नए चुनाव की तैयारी में जुट गया है। मतदाता सूची की जांच से लेकर गांवों के परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने साफ कहा है कि “पंचायत चुनाव समय पर होंगे, किसी तरह की अफवाह फैलाने की ज़रूरत नहीं है।” उनका यह बयान उन चर्चाओं के बीच आया, जिनमें चुनाव टलने की बातें की जा रही थीं। सरकार की तरफ़ से यह संकेत साफ है कि 2026 में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे, चाहे तारीख़ कुछ भी हो।
2021 के चुनाव में बड़ी संख्या में स्वतंत्र उम्मीदवार जीते थे। गांव में मतदाता यह देखता है कौन सुख-दुख में साथ खड़ा रहा, किसने रास्ता बनवाया, नाली बनवाई, कौन थाने-ब्लॉक के चक्कर में मदद करता है। यही वजह है कि पंचायत चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ व्यक्तिगत छवि सबसे अहम होती है।
सबसे पहले आपको बता दें कि पंचायत चुनाव तीन स्तरों पर कराए जाते हैं। ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत। इन पदों के लिए गांव के ही लोग उम्मीदवार बनते हैं। महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण भी तय किया जाता है, जिससे हर वर्ग की भागीदारी बनी रहे।
चुनाव की प्रक्रिया बिल्कुल तय नियमों से होती है। पहले चुनाव की अधिसूचना जारी होती है, फिर नामांकन। नामांकन के बाद पर्चों की जांच होती है और फिर प्रचार शुरू होता है। प्रचार बहुत साधारण होता है। घर-घर जाकर हाथ जोड़ना, छोटी सभाएं, और गांव की चौपाल पर बातचीत। मतदान के दिन गांव के लोग लाइन में लगकर वोट डालते हैं और फिर मतगणना के बाद नतीजा सामने आता है।
ग्राम प्रधान या पंचायत सदस्य बनने के लिए कोई बड़ा नेता होना ज़रूरी नहीं। ज़रूरी है गांव का मतदाता होना, कम से कम 21 साल की उम्र, समाज में स्वीकार्यता और काम करने की इच्छा। नामांकन के समय कुछ कागज़ और मामूली जमानत राशि देनी होती है। सही जानकारी के लिए ब्लॉक या जिला कार्यालय सबसे भरोसेमंद जगह होती है।
UP Panchayat Election 2026: क्या इस बार पंचायत चुनाव यूपी में होगा या नहीं?
UP पंचायत चुनाव 2026 सिर्फ गांव की सरकार चुनने का चुनाव नहीं है। यही चुनाव तय करेगा कि गांव की दिशा क्या होगी, जिला पंचायत पर किसका दबदबा रहेगा और 2027 की राजनीति की ज़मीन किसके पक्ष में बनेगी यही वजह है कि पंचायत चुनाव को सत्ता की पहली सीढ़ी कहा जाता है।