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सोनभद्र में आम आदमी पार्टी ने मोदी सरकार पर भारत की अस्मिता गिरवी रखने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन समझौतों को रद्द नहीं किया गया, तो वे सड़कों से संसद तक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
आप ने मोदी सरकार को घेरा
Sonbhadra: भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर देशभर में कई प्रकार की प्रतिक्रियाये आ रही हैं। विपक्षी दलों ने इस समझौते पर संसद में चर्चा की मांग की है और सरकार पर पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया है। वहीं आप पार्टी के जिलाध्यक्ष रमेश गौतम ने केंद्र सरकार पर भारत की अस्मिता और सम्मान को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने का गंभीर आरोप लगाया है।
रमेश गौतम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए इस ट्रेड डील की शर्तों, संभावित लाभार्थियों और दूरगामी प्रभावों पर न तो संसद को विश्वास में लिया गया है और न ही जनता के समक्ष पूर्ण पारदर्शिता बरती गई है। रमेश गौतम ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों को लेकर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है।
उनका कहना है कि सरकार किसान विरोधी और गरीब विरोधी नीतियां अपना रही है, जिससे देश की संप्रभुता खतरे में है। मौजूदा स्थिति की तुलना औपनिवेशिक काल से की, जब भारत ब्रिटिश हुकूमत के आदेशों का पालन करता था। उनका आरोप है कि आजादी के 78 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से अमेरिका भारत को फिर से गुलाम बनाने की कोशिश कर रहा है।
गौतम ने कहा कि यह सार्वजनिक जानकारी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ भारतीय उद्योग समूहों, जैसे अडानी, के खिलाफ जांच, समन और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित कार्रवाइयां चल रही हैं। उन्होंने एप्स्टीन प्रकरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने का भी जिक्र किया।
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आम आदनी पार्टी ने सवाल उठाया कि मोदी की ऐसी कौन सी मजबूरी या कमी है जिसके कारण वे अमेरिका के इशारों पर काम कर रहे हैं, चाहे वह 'सिंदूर ऑपरेशन' हो या व्यापारिक समझौते।
रमेश गौतम ने कहा कि रूस हमारा मित्र है। भारत अपनी 40% तेल की जरूरत रूस से पूरी करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के मना करने पर भारत ने इसे मान लिया, जिससे यह साबित होता है कि सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है।
साथ ही किसानों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि भारत में किसानों को 6,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जबकि अमेरिका में यह लाखों रुपये की होती है। भारतीय किसान अमेरिकी किसानों का मुकाबला नहीं कर सकते।
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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन समझौतों को रद्द नहीं किया गया, तो वे सड़कों से संसद तक विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस कार्यक्रम में दिनेश पटेल, राजेंद्र मौर्या, अनवर अली अंसारी, राजेश कुमार, शैल कुमारी शमशाम अली, ललित पटेल, लक्ष्मीनारायण गोविंद चौबे, नागेंद्र कुमार मौर्या, मुनौयर अली, असलउद्दीन, जोखन पटेल और श्रवण कुमार सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।