Maharajganj: सिसवा को लेकर बड़ी प्रशासनिक हलचल, व्यापारियों की भूमिका आई सामने, जानें आगे क्या होगा…

सिसवा नगर पालिका को तहसील बनाने की मांग तेज हो गई है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने व्यापारी संगठनों के साथ बैठक कर आगे की आंदोलन रणनीति तय की। 5 जनवरी को शहर बंद रहा और व्यापारी अभी भी संघर्ष जारी रखने पर अड़े हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 13 January 2026, 4:32 PM IST
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Maharajganj: 1871 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाई गई सिसवा नगर पंचायत को 150 साल बाद 2001 में नगर पालिका का दर्जा मिलने के बावजूद, सिसवा को तहसील बनाने की मांग अब भी अधूरी है। यह मुद्दा वर्षों से लंबित है और कई बार स्थानीय व्यापारियों और नागरिक संगठनों द्वारा इसकी उठान की गई, लेकिन अब हाल ही में व्यापारी संगठनों ने इसे नए सिरे से जोर देकर उठाने का निर्णय लिया है।

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने नगर के व्यापारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में हाल ही में हुई नगर बंदी को मिले व्यापक समर्थन के लिए व्यापारियों का आभार व्यक्त किया गया और आंदोलन की नई रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सिसवा को तहसील का दर्जा नहीं मिलेगा, यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

व्यापारी संगठन ने बनाई नई रणनीति

बैठक में संगठन के नगर अध्यक्ष शिब्बू खान और महामंत्री अधिवक्ता अशनी रोनियार ने कहा कि सिसवा नगर की तहसील की मांग केवल व्यापारियों की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्रवासियों की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने और नगर बंदी जैसे कदम उठाने का उद्देश्य अधिकारियों और सरकार के ध्यान को इस ओर आकर्षित करना है।

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कोषाध्यक्ष मकसूद अंसारी ने बताया कि व्यापारियों की मांगें लंबे समय से अनसुनी रही हैं। अब व्यापारी और नागरिक संगठनों के सहयोग से इस मुद्दे को राज्य और केंद्रीय स्तर तक पहुंचाने की योजना है। उपाध्यक्ष संदीप मल्ल ने कहा कि नगर बंदी जैसे कदम जरूरी हैं क्योंकि इससे स्थानीय प्रशासन और सरकार पर दबाव बनता है।

नगर बंदी से मिली व्यापक समर्थन

5 जनवरी को सिसवा शहर पूरी तरह बंद रहा। इस बंदी में नगर के सभी व्यापारी, दुकानदार और छोटे व्यवसाय शामिल हुए। इसके साथ ही नागरिक संगठनों, स्कूलों और स्थानीय समाजसेवी समूहों ने भी इसे समर्थन दिया। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने इस व्यापक समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद किया।

संगठन मंत्री मनीष रोनियार और संगठन मंत्री संताराम विश्वकर्मा ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य केवल तहसील का दर्जा प्राप्त करना नहीं है, बल्कि नगर के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर के हालिया विकास कार्यों में सरकारी योजनाओं की धीमी प्रगति इस मांग को और मजबूती देती है।

व्यापारी और नागरिक संगठनों की भूमिका

बनारसी गुप्ता और अविनाश मद्धेशिया सहित बड़ी संख्या में व्यापारियों ने बैठक में भाग लिया। सभी ने कहा कि व्यापारियों और नागरिकों का एकजुट होना इस आंदोलन की सफलता की कुंजी है। नगर के विभिन्न संगठनों ने भी इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।

व्यापारी संगठनों ने तय किया कि वे जल्द ही स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को ज्ञापन देंगे, और इस मुद्दे को विधानसभा और राज्य स्तरीय मंचों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा लेकिन यदि तहसील का दर्जा नहीं मिला तो व्यापारी और नागरिक संगठनों की हड़तालें और आंदोलन और भी तेज होंगे।

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भविष्य की रणनीति और अगले कदम

बैठक में तय किया गया कि व्यापार मंडल और अन्य संगठनों द्वारा नियमित रूप से बैठकें की जाएंगी। आगे की रणनीति में जन जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया पर समर्थन जुटाना और सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाना शामिल है। संगठन का मानना है कि जब तक सिसवा तहसील का दर्जा प्राप्त नहीं कर लेता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

व्यापारी नेताओं का कहना है कि तहसील बनने से न केवल प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार होगा बल्कि सिसवा में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। नगर के लोग भी इस कदम को नगर के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक मानते हैं।

Location : 
  • Maharajganj

Published : 
  • 13 January 2026, 4:32 PM IST

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