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मुजफ्फरनगर में शिवसेना ने हिंदू नेताओं की हत्याओं और गोतस्करी के मुद्दे पर जिला प्रशासन के जरिए प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने चार प्रमुख मांगें रखते हुए चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
शिवसेना का फूटा गुस्सा
Muzaffarnagar: मुजफ्फरनगर की फिजाओं में इन दिनों एक अजीब सा खौफ और गुस्सा तैर रहा है। लगातार हो रही हत्याओं और खुलेआम चल रही गोतस्करी के आरोपों ने माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है। इसी बढ़ती बेचैनी के बीच शनिवार को शिवसेना (पश्चिमी उत्तर प्रदेश इकाई) सड़कों पर उतर आई और जिला प्रशासन के जरिए प्रधानमंत्री के नाम एक बड़ा ज्ञापन सौंपते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दे डाली, अगर जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अब आंदोलन तय है।
शिवसेना नेताओं का कहना है कि जिले और देशभर में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। ज्ञापन में उन्होंने दावा किया कि हिंदू नेताओं की हत्याओं की घटनाएं एक के बाद एक सामने आ रही हैं, जिससे लोगों के मन में डर का माहौल बन गया है। संगठन का आरोप है कि इन घटनाओं को रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस और प्रभावी रणनीति नजर नहीं आ रही है।
ज्ञापन में कई चर्चित हत्याओं का उल्लेख करते हुए संगठन ने कहा कि कमलेश तिवारी, चंदन गुप्ता, कन्हैया लाल, तरुण खटीक और चंद्रशेखर उर्फ फरसे वाले बाबा जैसे मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। शिवसेना का कहना है कि यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा और इससे समाज में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।
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संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग इन घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनके साथ कई बार पुलिस सख्ती और अपमानजनक व्यवहार करती है। उनका कहना है कि इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है और प्रशासन के प्रति भरोसा कमजोर हो रहा है।
ज्ञापन में गोतस्करी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिवसेना के मुताबिक उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से बड़े पैमाने पर गायों की तस्करी हो रही है। संगठन का दावा है कि यह एक संगठित नेटवर्क के जरिए किया जा रहा है और कई बार प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। इससे तस्करों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं।
शिवसेना ने अपने ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि गो माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए और गो हत्या को संगठित अपराध की श्रेणी में लाया जाए, ताकि सख्त सजा सुनिश्चित हो सके। साथ ही जिन हिंदू नेताओं को खतरा है, उन्हें सुरक्षा दी जाए और जिनकी हत्या हो चुकी है, उनके परिवारों को आर्थिक सहायता मिले। संगठन ने यह भी मांग की कि विरोध के दौरान गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। इसके अलावा गोतस्करी रोकने के लिए एक विशेष सशक्त टीम बनाने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन के अंत में शिवसेना ने साफ कर दिया कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन बड़े स्तर पर जनआंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।