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कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसे में नया मोड़ आया है। अदालत में शिवम मिश्रा की ओर से दावा किया गया कि हादसे के समय कार मोहन चला रहा था। पुलिस अब भी शिवम को चालक मान रही है। नया वीडियो सामने आने से मामला और उलझ गया है। अगली सुनवाई में कार की रिहाई और ड्राइवर की भूमिका पर अहम फैसला हो सकता है।
कानपुर लैंबॉर्गिनी मामले में नया मोड़ (Img: Google)
Kanpur: कानपुर के बदनाम लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट केस में बुधवार (11 फरवरी) को कोर्ट की सुनवाई में बड़ा मोड़ आया। बचाव पक्ष ने शिवम मिश्रा की तरफ से नई दलील पेश की, जो पहले इस केस में आरोपी था। वकील ने दावा किया कि एक्सीडेंट के समय लग्जरी कार शिवम मिश्रा नहीं, बल्कि मोहन नाम का एक आदमी चला रहा था।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में लैंबॉर्गिनी कार को रिलीज करने की भी अर्जी दी, जो पुलिस कस्टडी में है। वकील ने दलील दी कि गाड़ी काफी समय से पुलिस स्टेशन में खड़ी है, जिससे उसकी हालत खराब हो सकती है, इसलिए कानूनी प्रोसेस के तहत उसे मालिक को लौटा दिया जाना चाहिए।
कोर्ट की सुनवाई के दौरान, शिवम मिश्रा के वकील ने कहा कि पुलिस ने जल्दबाजी में शिवम को आरोपी बना दिया, यह मानकर कि वह ड्राइवर है। उन्होंने कहा कि एक्सीडेंट के समय मोहन कार चला रहा था और अब उसे कोर्ट के सामने पेश किया गया है। बचाव पक्ष का यह भी कहना है कि एक्सीडेंट के बाद सामने आए फैक्ट्स की बिना किसी भेदभाव के जांच जरूरी है और असली ड्राइवर की पहचान किए बिना किसी पर इल्जाम लगाना गलत होगा।
दूसरी तरफ, कानपुर पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट पर अड़ी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौके से मिले सबूतों, CCTV फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर यह साफ है कि एक्सीडेंट के समय शिवम मिश्रा गाड़ी चला रहा था। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जांच जारी है और सभी पहलुओं की अच्छी तरह से जांच की जा रही है। अगर नए फैक्ट्स सामने आते हैं, तो उन्हें केस डायरी में शामिल किया जाएगा।
इस बीच, एक्सीडेंट के तुरंत बाद लिया गया एक और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में वही आदमी ड्राइविंग सीट पर दिख रहा है। एक पिछला वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें शिवम मिश्रा कार से उतरते हुए दिख रहा था। हालांकि, शिवम के पिता का दावा है कि कार उनका ड्राइवर चला रहा था। नए वीडियो के सामने आने से मामले में कन्फ्यूजन और बढ़ गया है। कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि मौजूद डिजिटल सबूत किसके पक्ष में हैं।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी चीफ मिनिस्टर ब्रजेश पाठक पहले ही साफ कर चुके हैं कि जांच पूरी तरह से बिना किसी भेदभाव के होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, चाहे उसका किसी भी प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक हो।
अगली कोर्ट की सुनवाई में यह तय होगा कि लैंबॉर्गिनी कार छोड़ी जाएगी या नहीं और क्या मोहन के बयान से जांच की दिशा बदलेगी। यह हाई-प्रोफाइल कानपुर केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।