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कानपुर के बहुचर्चित लैंबॉर्गिनी हिट एंड रन केस ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। तेज रफ्तार लग्ज़री कार से छह लोगों को कुचलने के आरोपी शिवम मिश्रा के वकील ने अदालत में ऐसी दलीलें पेश की हैं, जिनसे न सिर्फ मामला गरमा गया है बल्कि आम जनता में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
क्या शिवम मिश्रा बच पाएगा?
Kanpur: कानपुर के बहुचर्चित लैंबॉर्गिनी हिट एंड रन केस ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। तेज रफ्तार लग्ज़री कार से छह लोगों को कुचलने के आरोपी शिवम मिश्रा के वकील ने अदालत में ऐसी दलीलें पेश की हैं, जिनसे न सिर्फ मामला गरमा गया है बल्कि आम जनता में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। सवाल यही है कि क्या यह केस भी उन हाई-प्रोफाइल मामलों की तरह खत्म होगा, जहां आरोपी रसूख के दम पर कानून को मात दे देते हैं?
सोमवार को शिवम मिश्रा की ओर से पेश वकील मृत्युंजय कुमार ने दावा किया कि हादसे के वक्त लैंबॉर्गिनी शिवम नहीं बल्कि उनका ड्राइवर मोहन चला रहा था। वकील का कहना है कि शिवम मिर्गी (एपिलेप्सी) के मरीज हैं और घटना के समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसी वजह से वे खुद गाड़ी चलाने की हालत में नहीं थे।
हालांकि बचाव पक्ष की यह दलील सीसीटीवी फुटेज के सामने कमजोर पड़ती दिख रही है। सामने आए वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हादसे के तुरंत बाद एक बाउंसर ड्राइविंग सीट से शिवम मिश्रा को बाहर निकालता है। यह दृश्य वकील के उस दावे को सीधे तौर पर चुनौती देता है कि गाड़ी ड्राइवर चला रहा था।
हादसे में घायल और मृतकों के परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और घमंड का नतीजा है। उनका आरोप है कि आरोपी का परिवार प्रभावशाली है और अब कानूनी दांव-पेंच अपनाकर मामले को कमजोर किया जा रहा है। पीड़ित परिवारों ने निष्पक्ष जांच और कड़ी सजा की मांग की है।
यह मामला बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के हिट एंड रन केस की याद दिलाता है, जहां वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली और अंततः उन्हें राहत मिल गई। इसके अलावा अन्य हाई-प्रोफाइल सड़क हादसों में भी अक्सर देखा गया है कि पैसे और पहुंच के दम पर आरोपी कानून से बच निकलते हैं।
अब निगाहें अदालत और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। क्या सीसीटीवी और अन्य सबूतों के आधार पर शिवम मिश्रा को जवाबदेह ठहराया जाएगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? कानपुर की जनता और पीड़ित परिवारों के लिए यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि इंसाफ की आखिरी उम्मीद है।