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लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बजट को दिशाहीन बताते हुए पीडीए, यूपी, किसानों और मध्यम वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव
New Delhi: लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान सियासी तापमान उस वक्त बढ़ गया। जब समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार के बजट पर तीखा हमला बोला। अखिलेश ने बजट को दिशाहीन बताते हुए सवाल उठाया कि यह बजट देश के लिए है या किसी डील का नतीजा। उन्होंने पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को बजट से पूरी तरह गायब बताया और सरकार की नीयत व नीतियों पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया।
मंगलवार को लोकसभा में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट साफ तौर पर बिना दिशा का है। उन्होंने पूछा कि आखिर पहले डील बनी या फिर बजट तैयार हुआ। अगर यही डील करनी थी तो देश को 11 महीने तक इंतजार क्यों कराया गया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने एक बार फिर देश का बाजार खोल दिया है, ऐसे में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी की बात कहां जाएगी।
अखिलेश यादव ने बजट में उत्तर प्रदेश की अनदेखी का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि हर बार डबल इंजन सरकार की बात होती है, लेकिन जब बजट आता है तो यूपी के लिए कुछ खास नजर नहीं आता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता बीजेपी से जानना चाहती है कि 0 बड़ा है या 18। सरकार 2047 के विकसित भारत की बात तो करती है, लेकिन पिछले 10-11 सालों में पर कैपिटा इनकम तक नहीं बढ़ा पाई।
सपा प्रमुख ने किसानों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सभी दल किसानों की चिंता की बात करते हैं, लेकिन बजट में किसानों के लिए कुछ ठोस नहीं है। भारत-अमेरिका डील के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमारे किसान का क्या होगा। उन्होंने याद दिलाया कि काले कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को सड़क पर उतरना पड़ा था और सरकार को कानून वापस लेने पड़े थे, लेकिन आज भी MSP की कानूनी गारंटी नहीं दी गई है।
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अखिलेश यादव ने कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद टैक्स में राहत न देना सीधे तौर पर टैक्स शोषण है। मध्यम वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उन्होंने बीजेपी के बजट को 1 बटा 20 का बजट बताते हुए कहा कि यह सिर्फ 5 फीसदी लोगों के लिए बनाया जाता है। साथ ही गंगा और यमुना की हालत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में न गंगा ने किसी को बुलाया और न ही उसकी हालत सुधरी।