गोरखपुर AIIMS में खास पहल: पढ़ाई के साथ मानसिक मजबूती पर जोर, छात्रों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

AIIMS गोरखपुर में प्रथम वर्ष MBBS छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। SAATHI मॉड्यूल के जरिए छात्रों को पीयर सपोर्ट और गेटकीपर ट्रेनिंग दी गई।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 10 February 2026, 5:28 PM IST
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Gorakhpur: देश में मेडिकल छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव को देखते हुए अब संस्थान स्तर पर ठोस पहल शुरू हो गई है। इसी कड़ी में एआईआईएमएस गोरखपुर में प्रथम वर्ष एमबीबीएस छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और संवेदनशीलता को लेकर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न सिर्फ पढ़ाई के तनाव को समझने की कोशिश थी, बल्कि छात्रों को एक-दूसरे का सहारा बनने के लिए भी तैयार करने की पहल रहा।

SAATHI मॉड्यूल के जरिए मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संस्तुतियों और माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में एआईआईएमएस गोरखपुर के मनोरोग विभाग ने SAATHI नाम का एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया है। SAATHI का पूरा नाम “Student Awareness And Training for Holistic Intervention” है। इस मॉड्यूल का मकसद मेडिकल छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, पीयर सपोर्ट को मजबूत करना और गेटकीपर प्रशिक्षण देना है।

गेटकीपर ट्रेनिंग से बने सहपाठियों के सहायक

कार्यक्रम के दौरान छात्रों को यह सिखाया गया कि वे अपने साथ पढ़ने वाले दोस्तों में मानसिक तनाव, अवसाद या किसी तरह के जोखिम के शुरुआती संकेतों को कैसे पहचान सकते हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि ऐसी स्थिति में किस तरह समय रहते मदद कराई जा सकती है और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंचने में कैसे सेतु की भूमिका निभाई जा सकती है।

निदेशक के नेतृत्व में हुआ आयोजन

07 फरवरी 2026 को आयोजित यह कार्यक्रम एआईआईएमएस गोरखपुर की निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता के नेतृत्व में संपन्न हुआ। मनोरोग विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया यह मॉड्यूल पूरी तरह संवादात्मक और सहभागितापूर्ण रहा, जिसमें छात्रों ने खुलकर सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए।

क्यों जरूरी है मानसिक रूप से मजबूत होना

कार्यकारी निदेशक ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य शैक्षणिक उत्कृष्टता का अहम हिस्सा है और ऐसे कार्यक्रम आज के समय की जरूरत हैं। डीन (शैक्षणिक) ने कहा कि मानसिक रूप से सशक्त छात्र ही भविष्य में अच्छे और संवेदनशील डॉक्टर बन सकते हैं। वहीं डीन (छात्र कल्याण) ने समय रहते मदद लेने और एक-दूसरे का साथ देने पर जोर दिया।

आगे और छात्रों तक पहुंचेगा SAATHI मॉड्यूल

कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने इसे बेहद उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे सत्रों की मांग की। इस मॉड्यूल को मनोरोग विभाग की टीम ने विकसित किया है, जिसका नेतृत्व डॉ. मनोज पृथ्वीराज ने किया। डॉ. समन्त और डॉ. रिचा का भी इसमें अहम योगदान रहा। डॉ. मनोज पृथ्वीराज ने बताया कि आने वाले समय में यह मॉड्यूल अन्य एमबीबीएस बैचों, नर्सिंग छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों और पैरामेडिकल छात्रों के लिए भी लागू किया जाएगा।

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 10 February 2026, 5:28 PM IST

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