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फतेहपुर के किसनपुर में पुलिस प्रताड़ना से तंग आकर एक युवक ने आत्मदाह का प्रयास किया। पीड़ित अनिल शुक्ला का आरोप है कि वैध कागजात होने के बावजूद पुलिस विपक्षी के दबाव में मकान निर्माण रुकवाकर उसका मानसिक उत्पीड़न कर रही है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने युवक को बचाया, लेकिन घटना से खाकी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें।
फतेहपुर में आत्मदाह का प्रयास (Source: Google)
Fatehpur: एक युवक ने पुलिस के कथित उत्पीड़न और भ्रष्टाचार से तंग आकर सार्वजनिक रूप से आत्महत्या का प्रयास किया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने फुर्ती दिखाते हुए युवक के हाथ से माचिस छीन ली और उस पर पानी डालकर उसे अनहोनी से बचा लिया। इस घटना के बाद से पूरे कस्बे में तनाव और पुलिस के खिलाफ आक्रोश का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित अनिल शुक्ला किसनपुर कस्बे में अपनी खरीदी हुई जमीन पर मकान का निर्माण कार्य करवा रहा था। अनिल का दावा है कि उसके पास जमीन के बैनामे से लेकर 'दाखिल-खारिज' तक के सभी वैध कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं।
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विवाद तब शुरू हुआ जब कस्बे के ही एक अन्य व्यक्ति कमल शुक्ला ने पुलिस बल को एक शिकायती पत्र देकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी कोर्ट ऑर्डर या कानूनी आधार के, केवल विपक्षी की शिकायत पर उसके जीवन भर की कमाई से बन रहे आशियाने का काम बंद करवा दिया।
आत्मदाह के प्रयास के दौरान पीड़ित अनिल शुक्ला काफी भावुक और आक्रोशित नजर आया। उसने बताया कि उसने अपनी खून-पसीने की कमाई मकान बनाने में लगा दी है, लेकिन स्थानीय पुलिस उसे लगातार फर्जी तरीके से परेशान कर रही है।
पीड़ित के मुताबिक, "जब मेरे पास जमीन के सारे पेपर सही हैं, तो पुलिस किस आधार पर मुझे प्रताड़ित कर रही है? बिना किसी न्यायिक आदेश के निर्माण रोकना सरासर अन्याय है।" इस घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पीड़ित के पास वैध कागजात थे, तो पुलिस को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था, न कि उसे इस हद तक मजबूर करना कि वह अपनी जान देने पर उतारू हो जाए।