अमेठी में आस्था बनाम कब्जा, मंदिर विवाद पहुंचा प्रशासन के दरबार

अमेठी के वार्ड नंबर-7 स्थित काली माता मंदिर में अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने मंदिर परिसर में ताला लगाकर श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी, जिसके बाद प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 13 April 2026, 3:38 PM IST
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Amethi: अमेठी में आस्था के केंद्र बने एक मंदिर पर अब कब्जे का साया मंडरा रहा है। मामला सिर्फ जमीन या दीवारों का नहीं, बल्कि श्रद्धा और अधिकार का बन गया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने काली माता मंदिर परिसर में न सिर्फ कब्जा जमाने की कोशिश की, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए दरवाजे तक बंद कर दिए। गाली-गलौज, धमकी और जबरन कब्जे के आरोप ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है, जिससे हालात बिगड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।

काली माता मंदिर बना विवाद का केंद्र

अमेठी के नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 में स्थित काली माता मंदिर इन दिनों विवादों में घिरा है। यह मंदिर राजस्व अभिलेखों में रायपुर फुलवारी गाटा संख्या-537 के आबादी क्षेत्र में दर्ज है और एक पंजीकृत समिति संचालित करती है।

कब्जे की कोशिश का आरोप

मंदिर समिति ने आरोप लगाया है कि पवन अग्रहरि और संजय अग्रहरि नाम के दो लोगों ने मंदिर परिसर में कब्जा करने की नियत से अपनी गतिविधियां शुरू कर दीं। बताया गया कि उन्होंने धर्मशाला परिसर के अंदर अपने दैनिक उपयोग के सामान रखकर वहां रहने-खाने की व्यवस्था बना ली। धीरे-धीरे यह अस्थायी व्यवस्था स्थायी कब्जे में बदलने लगी, जिससे समिति के पदाधिकारियों में चिंता बढ़ गई।

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प्रशासन से की गई शिकायत

जब समिति के लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोका, तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि संबंधित लोगों ने बात मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद मंदिर समिति ने स्थानीय प्रशासन को प्रार्थना पत्र देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि मंदिर और धर्मशाला परिसर को कब्जे से मुक्त कराया जाए।

श्रद्धालुओं की एंट्री रोकी गई

मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोपितों ने मंदिर परिसर के अंदर स्थित हनुमान मंदिर और संतोषी माता मंदिर में ताला लगा दिया। समिति का कहना है कि इससे आम श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है। इतना ही नहीं, मंदिर में आने वाले लोगों के साथ गाली-गलौज भी की जा रही है और उन्हें अंदर जाने से रोका जा रहा है।

“मंदिर को अपनी संपत्ति बता रहे आरोपी”

मंदिर समिति के अनुसार, आरोपी लोग मंदिर को अपनी निजी संपत्ति बताकर लोगों को वहां से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे न सिर्फ धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

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राजस्व रिकॉर्ड का हवाला

समिति ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया है कि मंदिर का स्थान राजस्व अभिलेखों में दर्ज है और उपजिलाधिकारी द्वारा प्रमाणित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद अगर कब्जा हटाने में देरी होती है, तो इससे विवाद और बढ़ सकता है। समिति ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की मांग की है।

Location :  Amethi

Published :  13 April 2026, 3:38 PM IST

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