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चंबल नदी अब जैव विविधता का बड़ा केंद्र (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: कभी डकैतों की दहशत और बीहड़ों की रहस्यमयी दुनिया के लिए कुख्यात रही चंबल नदी आज अपनी नई पहचान गढ़ रही है। धूल और धुएं से दूर स्वच्छ वातावरण, साफ जलधारा और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर चंबल अब घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन, कछुओं और दुर्लभ पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बन चुकी है। संरक्षण प्रयासों के चलते यहां वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण जैव विविधता केंद्रों में शामिल हो रहा है।
चंबल नदी का स्वच्छ जल अनेक दुर्लभ जलीय जीवों के लिए अनुकूल आवास साबित हो रहा है। नदी में रेड लिस्ट में शामिल कछुओं की आठ प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है। इनमें साल, ढोर, पचेड़ा, काली ढोर, स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी और मोरपंखी प्रजातियां शामिल हैं।
दुनिया भर में घड़ियाल और डॉल्फिन लुप्तप्राय जीवों की श्रेणी में गिने जाते हैं, लेकिन चंबल नदी में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में यहां 2,938 घड़ियाल, 1,512 मगरमच्छ और 155 डॉल्फिन मौजूद हैं। यही वजह है कि चंबल का यह इलाका पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
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चंबल की वादियां केवल जलीय जीवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दुर्लभ पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास बन चुकी हैं। यहां 235 प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा है। इनमें विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके कई दुर्लभ पक्षी भी शामिल हैं।
ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, रूडी शेल्डक, इंडियन स्कीमर, रिवर टर्न और ब्लैक बैलीड टर्न जैसी दुर्लभ प्रजातियां चंबल के तटों और जलक्षेत्रों में आसानी से देखी जा सकती हैं। पक्षियों की बढ़ती संख्या इस क्षेत्र के बेहतर पर्यावरणीय संतुलन और संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत मानी जा रही है।
चंबल के बीहड़ों में वन्यजीवों की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है। यहां काले हिरन, चितकबरे हिरन और तेंदुओं की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। बीहड़ों की प्राकृतिक वादियां इन वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करा रही हैं।
पर्यटन और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए नंदगवां में 35 लाख रुपये की लागत से इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही बीहड़ों के बीच से गुजरने वाली नेचुरल ट्रेल भी विकसित की गई है, जिससे पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों को करीब से देख सकें।
चंबल सेंक्चुअरी बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज के अनुसार चंबल की खूबसूरत वादियां दुर्लभ जलीय जीवों और पक्षियों को अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही हैं। वहीं राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी परियोजना की डीएफओ चांदनी सिंह ने बताया कि चंबल में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है तथा पक्षियों का बसेरा भी विस्तारित हुआ है।
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साल 1950 से 1990 के बीच चंबल की वादियां डकैतों की गतिविधियों के लिए देशभर में चर्चित रहीं। पुतलीबाई, लवली पांडेय, सीमा परिहार, कुसमा नाइन, मुन्नी देवी, मानसिंह, मोहर सिंह, माधौसिंह, मलखान सिंह, रूपे पंडित, जगजीवन परिहार, रज्जन गुर्जर और निर्भय गुर्जर जैसे नाम कभी इस क्षेत्र की पहचान थे।
हालांकि समय के साथ चंबल की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। नदी के स्वच्छ पानी और सफल संरक्षण प्रयासों ने डकैतों की बदनामी के दाग को पीछे छोड़ दिया है। आज चंबल अपनी प्राकृतिक संपदा, दुर्लभ वन्यजीवों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जानी जाती है।
Location : Lucknow
Published : 5 June 2026, 2:44 PM IST