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अमेठी के जायस क्षेत्र में साइबर ठगों ने अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सऐप कॉल के जरिए युवक को विदेशी रकम ट्रांसफर कराने का झांसा देकर करीब नौ लाख रुपये ठग लिए। क्लियरेंस फीस और डॉलर को रुपये में बदलने के नाम पर क्यूआर कोड भेजकर अलग-अलग खातों में रकम मंगाई गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर अपराधियों की तलाश जारी है।
अमेठी में चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड
Amethi: जिले के जायस थाना क्षेत्र के मोहल्ला बड़ा गोरियाना निवासी रिजवान अहमद साइबर ठगी का शिकार हो गए। पीड़ित के अनुसार 19 नवंबर 2025 को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से उनके मोबाइल पर व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को विदेश में रहने वाला सुलेमान अयूब बताया और भरोसा जीतने के लिए आधार कार्ड तथा यूके का कार्ड व्हाट्सऐप पर भेजा।
धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाकर ठग ने रिजवान को विश्वास में ले लिया और बैंक खाते का विवरण मांगा। पीड़ित ने अपनी भाभी अफसरी बेगम का खाता नंबर साझा कर दिया, जिसमें उस समय शून्य बैलेंस था। इसके बाद ठग ने बैंक ऑफ अमेरिका की कथित डिपॉजिट स्लिप भेजकर खाते में विदेशी रकम आने का झांसा दिया।
पीड़ित ने बताया कि ठग ने उसे एक मोबाइल नंबर दिया, जिसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मुंबई शाखा का बताया गया। उस नंबर पर संपर्क करने पर डॉलर को रुपये में बदलने की प्रक्रिया बताई गई और क्लियरेंस से पहले पांच हजार रुपये जमा कराने को कहा गया।
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जब यूपीआई के जरिए रकम भेजी गई तो खाते में सैफ अली नाम दिखाई दिया। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से लगातार क्यूआर कोड भेजे जाते रहे और हर बार अलग विभाग की क्लियरेंस फीस के नाम पर पैसे मांगे गए। 10 दिसंबर तक पीड़ित से किस्तों में करीब आठ से नौ लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। रकम जुटाने के लिए रिजवान ने अपने बेटे और पारिवारिक मित्रों से भी पैसे मंगवाए। काफी समय तक उन्हें ठगी का अहसास नहीं हुआ।
पीड़ित को तब शक हुआ जब एक मित्र ने उन्हें साइबर ठगी की आशंका जताई। जांच करने पर पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने जायस थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। प्रभारी निरीक्षक अमरेन्द्र सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साइबर सेल की मदद से नंबरों और खातों की जांच की जा रही है तथा ट्रांजैक्शन डिटेल खंगाली जा रही है।
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पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय नंबरों से आने वाली कॉल, क्यूआर कोड के जरिए पैसे भेजने और क्लियरेंस फीस के नाम पर मांगी जाने वाली रकम से सतर्क रहें। बिना सत्यापन किसी को भी बैंक विवरण या ओटीपी साझा न करें, अन्यथा वे भी ऐसे गिरोह का शिकार हो सकते हैं।