हरियाली बचाने के दावों के बीच देवरिया में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, आखिर वन विभाग मौन क्यों?

देवरिया के भटनी क्षेत्र के सिसई गांव में बिना परमिट पेड़ों की कटाई के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की चुप्पी से ठेकेदार बेखौफ हैं। अवैध कटान से हरियाली घट रही है, जबकि प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Updated : 16 June 2026, 10:23 AM IST
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Deoria: जनपद देवरिया में वन विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर सरकार और वन विभाग वृक्षारोपण अभियान को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध पेड़ कटान की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण लकड़ी काटने वाले ठेकेदार बेखौफ होकर हरियाली को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

‘एक वृक्ष दस पुत्र समान’ संकल्प पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “एक वृक्ष दस पुत्र समान” जैसे संदेशों के साथ वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। देवरिया में भी वन विभाग द्वारा बड़े स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। पुराने और छायादार वृक्षों की लगातार कटाई से सरकार के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।

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भटनी क्षेत्र में अवैध कटान का आरोप

भटनी थाना क्षेत्र के सिसई ग्राम सभा में बिना परमिट के फलदार एवं कीमती वृक्षों की कटाई का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां ठेकेदार खुलेआम पेड़ों पर आरी चला रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय पुलिस और वन विभाग की ओर से किसी प्रभावी कार्रवाई का अभाव दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले में मौन और मूकदर्शक बना हुआ है।

ठेकेदारों की गतिविधियों पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में लकड़ी का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। नियमों की अनदेखी कर पेड़ों की कटाई की जा रही है और कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती दिखाई दे रही है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।

पूर्व में भी उठ चुके हैं विवाद

देवरिया में यह पहला मामला नहीं है जब अवैध पेड़ कटान और ठेकेदारों से जुड़े विवाद सामने आए हों। इससे पहले भी कई बार वन विभाग और ठेकेदारों के बीच टकराव की स्थिति बन चुकी है। इन घटनाओं ने विभागीय कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े किए हैं और निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को उजागर किया है।

पर्यावरण प्रेमियों की चिंता

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटान पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले वर्षों में जनपद का हरित क्षेत्र तेजी से घट सकता है। उनका मानना है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है, जिसका सीधा असर जलवायु और जीवन पर पड़ेगा।

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जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी एवं उच्च वन अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

बड़ा सवाल बरकरार

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वन संपदा की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है? यदि इसी तरह पेड़ों पर आरी चलती रही और जिम्मेदार विभाग मौन बना रहा तो हरियाली बचाने के सरकारी दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और वन विभाग इस मामले में कब और कितनी सख्ती से कार्रवाई करते हैं।

Location :  Deoria

Published :  16 June 2026, 10:22 AM IST

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