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देवरिया के रामनाथ वार्ड में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत बने मकानों को खाली कराने के नोटिस से लाभार्थियों में रोष है। दर्जनों महिलाओं ने जिलाधिकारी से शिकायत कर विभाग पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
जिलाधिकारी से शिकायत के लिए पहुंची महिलाएं
Deoria: देवरिया जिले में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत बने घरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देवरिया नगर पालिका परिषद के DUDA विभाग की तरफ से 2018-19 में मंजूर हुए घरों को खाली करने का नोटिस जारी होने से लाभार्थियों में दहशत फैल गई है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, देवरिया सदर थाना क्षेत्र के रामनाथ वार्ड नंबर 17 में रहने वाले कई परिवारों ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए जिला मजिस्ट्रेट से न्याय की गुहार लगाई है।
दरअसल, 2018-19 में DUDA विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत चुने गए लाभार्थियों के लिए घर मंजूर किए थे। सभी लाभार्थी अपने DPR नंबर के हिसाब से इन घरों में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। लेकिन, एक हफ्ते पहले विभाग ने उन्हें घर खाली करने का नोटिस जारी कर दिया। नोटिस मिलने के बाद दर्जनों परिवार चिंता और निराशा से भर गए हैं।
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मंगलवार यानी 17 फरवरी को सीता देवी, शारदा देवी, राधा देवी, सनी देवी, ध्रुव देवी, साधना देवी और रुगनी देवी समेत दर्जनों महिलाएं डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के ऑफिस पहुंचीं। उन्होंने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट दिव्या मित्तल को एक लिखित शिकायत दी, जिसमें आरोप लगाया कि डूडा डिपार्टमेंट उन पर घर खाली करने और रिकवरी के लिए दबाव बना रहा है।
महिलाओं ने कहा कि वे पीढ़ियों से एक ही जमीन पर रह रही हैं और सभी सरकारी डॉक्यूमेंट्स एक ही पते पर हैं।
पीड़ित परिवारों का दावा है कि उनके पास राशन कार्ड, वोटर ID, आधार कार्ड, बिजली बिल, गैस कनेक्शन, हाउस टैक्स की रसीदें और यहां तक कि डिपार्टमेंट से अप्रूव्ड नक्शा भी है। इसके बावजूद डिपार्टमेंट का नोटिस जारी करना समझ से बाहर है।
महिलाओं ने कहा कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला, तो वे मुख्यमंत्री के पास जाने को मजबूर होंगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने जांच के आदेश दिए हैं।
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अभी एडमिनिस्ट्रेटिव जांच चल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी सही वजह के बेनिफिशियरी को निकालना गरीब परिवारों के साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। अब सबकी नजरें एडमिनिस्ट्रेशन की जांच रिपोर्ट पर हैं, जिससे यह साफ होगा कि नोटिस जारी करने का कारण क्या है और आगे क्या एक्शन लिया जाएगा।