कलेजा चीर देगी बदायूं की यह दरिंदगी, जाति पूछकर किशोरी को खेत में खींचा और फिर… 3 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली क्यों?

बदायूं के इस्लामनगर में 13 वर्षीय किशोरी से मक्के के खेत में दरिंदगी का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर तहरीर बदलवाई और छेड़छाड़ की हल्की धाराओं में केस दर्ज किया। आरोपी अब भी फरार हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 June 2026, 1:42 PM IST
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Budaun: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के इस्लामनगर थाना क्षेत्र से कानून-व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा को पूरी तरह झकझोर देने वाली एक बेहद संवेदनशील घटना सामने आई है। यहां एक 13 वर्षीय नाबालिग किशोरी के साथ मक्के के खेत में ले जाकर बर्बरता और दरिंदगी किए जाने का मामला सामने आया है। सबसे बड़ी बात यह है कि घटना को तीन दिन बीत गये हैं लेकिन पुलिस के हाथ अभी भी खाली है। अब इस मामले में पीड़ित परिवार ने मंगलवार को पुलिस पर गंभीर आरोप लगाये हैं।

इस घटना को लेकर जहां पीड़ित परिवार खौफ और सदमे में है, वहीं ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और तूल पकड़ता जा रहा है।

जाति पूछकर जबरन खेत में खींच ले गए आरोपी

पीड़ित परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना बीते दिनों की है जब किशोरी घरेलू काम से घर से बाहर निकली थी। तभी रास्ते में बाइक सवार दो अज्ञात युवकों ने उसे रोक लिया। आरोपियों ने पहले किशोरी से उसकी जाति पूछी और फिर जबरन खींचकर उसे पास के एक मक्के के घने खेत में ले गए। आरोप है कि वहाँ किशोरी के साथ गंभीर वारदात को अंजाम दिया गया।

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इसी बीच, वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने जब हलचल और शोर सुना, तो वह मदद के लिए खेत की तरफ दौड़ा। राहगीर को देखते ही डरी-सहमी बदहवास किशोरी रोते हुए चीख पड़ी कि "भैया, इन्होंने मेरे साथ गलत काम किया और मारपीट कर कपड़े फाड़ दिए।" पकड़े जाने के डर से आरोपी मौके से फरार हो गए, लेकिन जाने से पहले उन्होंने पीड़िता को जुबान बंद रखने की धमकी भी दी।

पुलिस पर तहरीर बदलवाने का संगीन आरोप

इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर पीड़ित परिवार ने गहरी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया है। परिजनों का सीधा आरोप है कि जब वे न्याय की गुहार लेकर इस्लामनगर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी मूल शिकायत के आधार पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन पर दबाव बनाया। परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने जबरन तहरीर बदलवा दी और इस बेहद संगीन मामले को केवल 'छेड़छाड़' की मामूली और हल्की धाराओं में दर्ज कर लिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि ऐसा करके अपराधियों को बचाने और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है।

वारदात के तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

इस जघन्य वारदात को बीते तीन दिन से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन दोनों नामजद और अज्ञात आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर खुलेआम घूम रहे हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार लगातार दहशत के साए में जीने को मजबूर है। गाँव के लोगों में भी इस बात को लेकर कड़ा गुस्सा है कि एक मासूम बेटी के साथ इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी प्रशासन इतनी सुस्ती क्यों बरत रहा है और आरोपियों को कानून का डर क्यों नहीं है।

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मामले पर क्या है प्रशासनिक अधिकारियों का रुख?

मामला बढ़ने और चौतरफा उठ रहे सवालों के बीच क्षेत्राधिकारी (सीओ) बिल्सी ने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा है कि पुलिस महिलाओं और बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में पूरी संजीदगी से काम करती है। उन्होंने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल मामला प्रक्रिया के अधीन है। पीड़िता के अदालत में धारा 164 के तहत बयान दर्ज होने अभी बाकी हैं। सीओ ने भरोसा दिलाया कि कोर्ट में होने वाले बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुकदमे में उचित और गंभीर धाराएं बढ़ाई जाएंगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Location :  Budaun

Published :  30 June 2026, 1:20 PM IST

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