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राम मंदिर (Image Source: Pinterest)
Ayodhya: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी पहली और बेहद संवेदनशील रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। पिछले 6 दिनों से 150 संदिग्धों, सीसीटीवी फुटेज और बैंक खातों को खंगालने के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट के मुख्यमंत्री की मेज पर पहुंचते ही अब आरोपियों पर कानूनी हंटर चलना तय हो गया है। इस रिपोर्ट के बाद राम मंदिर प्रबंधन से लेकर राजनीतिक गलियारों तक खलबली मची हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और गृह विभाग एक्शन मोड में आ गए हैं। आने वाले 24 से 48 घंटों के भीतर इन बड़े कदमों की उम्मीद की जा रही है:
जिन 25 सेवादारों के खिलाफ एसआईटी ने पुख्ता सबूत जुटाए हैं, उन्हें ट्रस्ट से तुरंत बर्खास्त कर पुलिस कस्टडी में लिया जा सकता है। इन पर गर्भगृह और दान-पात्रों से सीधे नकदी और कीमती सामग्री गायब करने का आरोप है।
चूंकि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के अयोध्या से बाहर जाने पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है, अब एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर इन बड़े पदाधिकारियों से दोबारा और कड़े सवाल-जवाब करेगी ताकि प्रबंधन की लापरवाही तय की जा सके।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गर्भगृह के पास लगे खास कैमरों के एंगल जानबूझकर बदले गए थे। इस तकनीकी साजिश में शामिल मंदिर के टेक्निकल स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों पर साजिश रचने और सबूत मिटाने की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा।
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एसआईटी की इस रिपोर्ट में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में लगी बड़ी सेंध का भी जिक्र है। इस खूनी खेल और हेराफेरी को रोकने के लिए अब मंदिर के पूरे सुरक्षा ढांचे को बदला जा रहा है। एसआईटी की सिफारिश पर अब दानपात्रों के पास 'स्मार्ट डिजिटल वेट-मशीन और हाई-टेक स्कैनर' लगाने के निर्देश जारी होने वाले हैं। इसके तहत दानपात्र में गिरने वाले हर एक सिक्के और नोटों के बंडल की लाइव काउंटिंग और ट्रैकिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सर्वर रूम से जुड़ी होगी, ताकि अयोध्या का कोई भी स्थानीय कर्मचारी इसमें दखल न दे सके।
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शासन के बेहद उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करने का मन बना चुके हैं। अब मंदिर के वित्तीय लेन-देन की ऑडिटिंग के लिए देश की एक स्वतंत्र और शीर्ष ऑडिट संस्था को नियुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा, गर्भगृह की सुरक्षा और चढ़ावे के कलेक्शन का जिम्मा पूरी तरह से सरकारी सुरक्षा एजेंसियों या किसी विशेष विंग को सौंपने पर विचार चल रहा है। इस कार्रवाई का सीधा संदेश यह है कि आस्था के केंद्र में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे सामने कितना ही बड़ा रसूखदार क्यों न हो।
Location : Ayodhya
Published : 22 June 2026, 8:49 AM IST