25 हजार का इनामी, 4 पन्नों का सुसाइड नोट और… देवरिया शिक्षक केस में खुला खौफनाक राज

देवरिया के बहुचर्चित शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में फरार चल रहे ₹25,000 के इनामी लिपिक संजीव सिंह ने गोरखपुर की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव पहले ही गिरफ्तार हो चुकी हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 22 June 2026, 9:41 AM IST
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Deoria: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सबसे चर्चित और रूह कंपा देने वाले शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में पुलिस के बढ़ते दबाव के आगे आखिरकार आखिरी बड़े आरोपी ने भी घुटने टेक दिए हैं। पिछले कई महीनों से कानून की आंख में धूल झोंककर फरार चल रहे ₹25,000 के इनामी और बेसिक शिक्षा विभाग के लिपिक संजीव सिंह ने शनिवार को गोरखपुर की अदालत में चुपचाप आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया।

यह पूरा मामला अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत में पेश हुआ, जहां से कोर्ट ने आरोपी लिपिक को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में सीधे जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। संजीव सिंह के जेल जाने के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल खूनी खेल के सभी किरदार अब सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।

क्या था पूरा मामला और क्यों दी शिक्षक ने जान?

यह सनसनीखेज मामला इस साल 22 फरवरी को तब सामने आया था, जब शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने विभाग के बड़े अफसरों की प्रताड़ना से तंग आकर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। घटना के बाद मृतक की जेब से पुलिस को चार पन्नों का एक बेहद भावुक और सनसनीखेज सुसाइड नोट मिला था। इस सुसाइड नोट में शिक्षक ने अपनी मौत के लिए तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शालिनी श्रीवास्तव और मुख्य लिपिक संजीव सिंह को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।

16-16 लाख की घूस और मानसिक प्रताड़ना का खेल

पुलिस और जांच एजेंसियों की तफ्तीश में जो सच सामने आया, वह शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाला था। आरोप है कि हाईकोर्ट के एक आदेश का डर दिखाकर और नौकरी बचाने के नाम पर पीड़ित शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन अन्य शिक्षकों से कथित तौर पर 16-16 लाख रुपये की मोटी रकम (रिश्वत) की मांग की गई थी। पैसे न देने पर 20 फरवरी को शिक्षक को दफ्तर बुलाकर बुरी तरह जलील किया गया और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई, जिससे टूटकर अगले ही दिन उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

पहले ही नप चुकी हैं तत्कालीन लेडी बीएसए

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था। इसके बाद गुलरिहा पुलिस ने जाल बिछाकर 16 जून को शालिनी श्रीवास्तव को देश की राजधानी नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। वहीं, एक अन्य आरोपी पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को भी पुलिस पहले ही जेल की हवा खिला चुकी है।

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शिक्षा विभाग के 'काले कारनामों' की खुलेगी फाइल 

विभागीय सूत्रों और पुलिस के खुफिया तंत्र से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले लिपिक संजीव सिंह के पास देवरिया शिक्षा विभाग के कई ऐसे 'राज' दफन हैं जो कई अन्य बड़े चेहरों को बेनकाब कर सकते हैं। पुलिस अब संजीव सिंह को कोर्ट से रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि उसके बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों की जांच की जा सके। यह भी पता चला है कि इस रैकेट का जाल सिर्फ देवरिया तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कुछ फर्जी शिक्षकों के दस्तावेजों को सही साबित करने के नाम पर भी करोड़ों की उगाही का खेल चल रहा था। पुलिस डायरी के मुताबिक, जल्द ही इस मामले में कुछ और विभागीय कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।

Location :  Deoria Deoria

Published :  22 June 2026, 8:32 AM IST

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