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Ballia: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक बेहद अनोखी और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित रेवती बस स्टैंड के मझौवा मठ और लक्ष्मी नारायण मंदिर की गद्दी अब एक 11 साल के बच्चे के हाथों में सौंप दी गई है। कल रविवार को आयोजित एक भव्य और दिव्य धार्मिक अनुष्ठान में चौथी कक्षा में पढ़ने वाले शास्वत शौर्य तिवारी का नए महंत के रूप में तिलक और अभिषेक किया गया।
सनातन परंपरा के अनुसार संत समाज ने उनका नया नाम 'श्याम नारायण रामानुज श्री वैष्णोदास' रखा है। इस कम उम्र के बालक को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा अब पूरे प्रदेश में आग की तरह फैल गई है।
रविवार को आयोजित इस भव्य समारोह में काशी, अयोध्या और स्थानीय क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विद्वानों और बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। इस पूरी दीक्षा प्रक्रिया को संपन्न कराते हुए रामभद्राचार्य उर्फ बालक दास ने शास्वत शौर्य तिवारी का पहले विधि-विधान से यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार कराया, जिसके बाद उन्हें गुरु दीक्षा दी गई। यह पद जून 2025 में पूर्व महंत मकसुदनाचार्य के ब्रह्मलीन होने के बाद से खाली चल रहा था।
अभिषेक के दौरान पत्रकारों ने जब नन्हे महंत से पूछा कि क्या वे इतनी कम उम्र में दो-दो मठों की बड़ी जिम्मेदारी संभाल पाएंगे? इस पर बालक ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराकर जवाब दिया—"संभाल लूंगा।" वहीं जब उनसे बाल सुलभ अंदाज में शादी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने शर्माते हुए कहा—"मैं कभी शादी नहीं करूंगा।"
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दीक्षा और अभिषेक के गंभीर माहौल के बीच एक बेहद मनमोहक और भावुक पल भी देखने को मिला। जब मंत्रोच्चार के साथ नन्हे महंत के सिर पर शीतल जल डाला जा रहा था, तभी उनके परिवार का वीडियो कॉल आ गया। फोन पर अपनी मां से बात करते हुए बालक ने अपनी मासूमियत बिखेरी और कहा, "सिर पर ठंडा पानी गिर रहा है, बहुत अच्छा लग रहा है।" इसके तुरंत बाद उसने पूछा, "मैं घर कब आऊंगा?" इस दृश्य ने वहां मौजूद सभी संतों और श्रद्धालुओं को मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया।
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चूंकि नए महंत श्याम नारायण दास अभी केवल 11 वर्ष के हैं और अपनी स्कूली शिक्षा (कक्षा 4) पूरी कर रहे हैं, इसलिए मठ की अकूत संपत्ति, जमीनों और रोजमर्रा के प्रबंधन को लेकर संतों ने एक विशेष रणनीति बनाई है। गुरु बालक दास ने बताया कि जब तक महंत जी बालिग और पूरी तरह योग्य नहीं हो जाते, तब तक पुरुषोत्तम तिवारी और करुणानिधि तिवारी की अगुवाई में बना 'विशेष संरक्षक मंडल' ही मठ की कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था देखेगा। नन्हे महंत को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कड़े नियमों के तहत उपनिषदों, वेदों और वैष्णव परंपरा के ग्रंथों का विशेष अध्ययन कराया जाएगा, जिसके लिए विशेष आचार्य नियुक्त किए जा रहे हैं।
Location : Ballia
Published : 22 June 2026, 8:21 AM IST