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अयोध्या राम मंदिर (Image Source: Pinterest)
Ayodhya: अयोध्या के भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान की राशि में चोरी का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इस पूरे प्रकरण पर खुलकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दान को लेकर पूरी पारदर्शिता रखी जानी चाहिए और मंदिर में आने वाले चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब रोजाना आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि चढ़ावे में चोरी कब से हो रही थी, इसका सटीक अंदाजा लगा पाना फिलहाल बेहद मुश्किल है।
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर प्रशासन की ओर से दान राशि की गिनती को लेकर बेहद सख्त गाइडलाइन बनाई गई थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन (इम्प्लीमेंटेशन) में गंभीर कमी रह गई। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक, नोटों की गिनती करने वाले कर्मियों को बिना जेब (पॉकेट) वाले कपड़े पहनने चाहिए और उनकी कड़ी तलाशी होनी चाहिए। लेकिन ऐसी चर्चाएं हैं कि कुछ लोग जेबों में नोटों की गड्डियां लेकर बाहर निकल गए। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पैसों की गिनती की मुख्य जिम्मेदारी बैंक की है और उनके साथ बाकायदा एक समझौता (MoU) भी हुआ था, जिससे बैंक पल्ला नहीं झाड़ सकता।
ट्रस्ट के कर्ताधर्ता चंपत राय का बचाव करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि वह पिछले 35 वर्षों से मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए हैं, इसलिए उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। समस्या निष्ठा में नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र में हुई चूक की है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा दान पात्र में डाली गई सोने की अंगूठियां, चूड़ियां और कान के गहने जैसी बेशकीमती धातुओं की रसीदें मौजूद नहीं हैं, जिसकी जांच अब विशेष जांच दल (SIT) कर रही है। मंदिर में हर महीने करीब 4 से 10 करोड़ रुपये तक का चढ़ावा आता है और इस घटना से श्रद्धालुओं के विश्वास को जो ठेस पहुँची है, उसे जल्द से जल्द ठीक करना होगा।
नृपेंद्र मिश्रा ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जो कोई भी भगवान के चढ़ावे के साथ बेईमानी कर रहा है, उसे सात वंशों तक श्राप लगेगा। उन्होंने मामले की लीपापोती की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए कहा कि एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी। उन्होंने प्रशासनिक सुधार के लिए एक सीनियर अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाने की वकालत की है। इस पूरे मामले की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय के सहयोगियों द्वारा भी उनसे मांगी गई है।
इस सुरक्षा चूक के बाद राम मंदिर ट्रस्ट अब भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बड़े तकनीकी बदलाव करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अब दान पात्रों और काउंटिंग रूम की निगरानी के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत अलार्म बजा देंगे। इसके साथ ही, अब पूरे दान और आभूषणों के प्रबंधन के लिए एक 'डिजिटल ऑडिट सिस्टम' लागू किया जाएगा, जिससे हर एक सिक्के और गहने का रियल-टाइम रिकॉर्ड रखा जा सके।
Location : Ayodhya
Published : 19 June 2026, 9:04 AM IST