सदन में हंगामे से आहत सतीश महाना, पद छोड़ने तक की चेतावनी; यूपी की राजनीति में मची हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा में हंगामे के बाद स्पीकर सतीश महाना विपक्ष के रवैये से आहत नजर आए। उन्होंने सदन में कहा कि वह इस बात पर विचार करेंगे कि क्या वह इस पद पर बने रहने के योग्य हैं। जानिए पूरा घटनाक्रम और इसके राजनीतिक मायने।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 5 August 2026, 1:50 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को उस समय माहौल बेहद गंभीर हो गया, जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी। सदन में लगातार हो रहे हंगामे और विपक्ष के रवैये से नाराज दिखे स्पीकर ने कहा कि वह इस बात पर गंभीरता से विचार करेंगे कि क्या वह इस गरिमामयी पद पर बने रहने के योग्य हैं। उनके इस बयान के बाद कुछ देर के लिए सदन में सन्नाटा छा गया और सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के सदस्य भी हैरान नजर आए।

राम मंदिर मुद्दे पर हंगामे के बाद बढ़ा विवाद

दरअसल, एक दिन पहले विधानसभा में राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को लेकर विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया था। विपक्षी सदस्यों ने सदन के भीतर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कार्यवाही बाधित की। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कई बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन जब स्थिति नहीं संभली तो उन्होंने समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। बाद में उन्हें पूरे सत्र के लिए निष्कासित भी कर दिया गया।

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कार्यवाही शुरू होते ही छलका स्पीकर का दर्द

बुधवार को जब विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो सभी की नजरें सदन की स्थिति पर थीं। इसी दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह का वातावरण सदन में बनाया जा रहा है, उससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि वह इस बात पर गंभीरता से विचार करेंगे कि क्या वह इस गरिमामयी पद पर बने रहने के योग्य हैं या नहीं। स्पीकर का यह बयान सुनते ही सदन में कुछ देर के लिए पूरी तरह सन्नाटा छा गया। कई विधायक एक-दूसरे की ओर देखने लगे, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्य भी इस बयान से गंभीर नजर आए।

सदन की गरिमा बनाए रखने पर दिया जोर

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अपने संबोधन में सतीश महाना ने संकेत दिया कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और यहां हर सदस्य की जिम्मेदारी है कि वह नियमों और परंपराओं का सम्मान करे। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का दायित्व निष्पक्ष होकर सदन का संचालन करना होता है और यदि लगातार व्यवधान उत्पन्न होंगे तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी।

Location :  Lucknow

Published :  5 August 2026, 1:50 PM IST

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