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नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर एनटीए की कार्रवाई (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: नीट-यूजी परीक्षा को लेकर देश भर में छिड़े विवाद और गड़बड़ियों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने एक कड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने लातूर के एक कोचिंग सेंटर के मालिक के बेटे को अगले दो साल तक नीट-यूजी परीक्षा में शामिल होने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में धांधली के गंभीर आरोपों के मद्देनजर की गई है।
यह पूरा घटनाक्रम लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर के मालिक शिवराज मोटेगांवकर से जुड़ा है, जिन्हें इस साल के नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, शिवराज मोटेगांवकर ने केमिस्ट्री विषय के प्रश्न पत्र हासिल करने के लिए पीवी कुलकर्णी को पांच लाख रुपये दिए थे। दिलचस्प बात यह है कि कुलकर्णी उसी पैनल का हिस्सा थे जिसे एनटीए ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। सीबीआई का यह भी आरोप है कि आरोपी कोचिंग संचालक का बेटा, आदित्य मोटेगांवकर, कुलकर्णी की ही कोचिंग क्लास में पढ़ता था और वहीं उसे ये प्रश्न उपलब्ध कराए जाते थे।
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एनटीए द्वारा 19 सितंबर को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस साल की शुरुआत में आयोजित परीक्षा के लिए आदित्य मोटेगांवकर का परीक्षा परिणाम रोक दिया गया है। इतना ही नहीं, उसे आगामी नीट-यूजी 2027 तक के लिए परीक्षा से डिबार कर दिया गया है।
इससे पहले, 21 जून को नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा आयोजित होने के बाद एनटीए ने आदित्य के परिणामों को रोकते हुए कथित अनियमितताओं पर उनका स्पष्टीकरण मांगा था। अपने जवाब में छात्र ने परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार के अनुचित साधन या नकल के इस्तेमाल से साफ इनकार किया था। साथ ही, उसने यह भी सवाल उठाया था कि उसे भेजा गया नोटिस 3 मई की मूल परीक्षा से जुड़ा था, ऐसे में बाद में हुई दोबारा परीक्षा में उसका परिणाम क्यों रोका गया है।
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राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली नीट-यूजी परीक्षा इस साल भारी विवादों में घिर गई थी। व्यापक स्तर पर पेपर लीक के आरोप लगने के बाद एनटीए ने 3 मई को हुई परीक्षा को रद्द कर दिया था और इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा संपन्न कराई गई थी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पिछले महीने ही दिल्ली की एक विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट में अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है। यह विशेष अदालत देश भर में सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए बनाई गई है। एनटीए का यह ताजा फैसला इसी कड़ी में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Location : New Delhi
Published : 24 September 2026, 11:29 AM IST