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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के गैस बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। एलपीजी सप्लाई पर दबाव और कीमतों में बढ़ोतरी के बीच शहरों में इंडक्शन कुकटॉप और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग डिवाइस की मांग तेजी से बढ़ रही है। एयर फ्रायर, माइक्रोवेव, राइस कुकर और इलेक्ट्रिक पैन जैसे उपकरण अब गैस के विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
इलेक्ट्रिक कुकिंग डिवाइस
New Delhi: दुनिया के दूसरे छोर पर भड़की तनाव की आग अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचती दिखाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां हर छोटी हलचल का असर सीधे आम आदमी की जिंदगी पर पड़ रहा है। हाल के दिनों में Middle East में बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है और इसका असर अब भारत के गैस बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है, कीमतें ऊपर जा रही हैं और लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। ऐसे हालात में घरों की रसोई में नई जुगाड़ तकनीकें दिखाई देने लगी हैं। गैस की जगह अब इलेक्ट्रिक कुकिंग डिवाइस तेजी से लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं।
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसका सीधा असर भारत के एलपीजी सप्लाई चैन पर भी देखने को मिल रहा है। कई शहरों में गैस सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है, जबकि कुछ जगहों पर इसकी कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला है। ऐसे में आम परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गैस समय पर न मिले तो रोजमर्रा का खाना कैसे बनेगा। यही वजह है कि लोग अब ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जो बिजली से चल सकें और जिनसे आसानी से खाना पकाया जा सके।
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बीते कुछ वर्षों में एयर फ्रायर धीरे-धीरे भारतीय किचन में जगह बना रहा था, लेकिन गैस संकट के बाद इसकी लोकप्रियता और तेजी से बढ़ गई है। यह डिवाइस गर्म हवा के तेज सर्कुलेशन की मदद से खाना पकाता है और इसमें बहुत कम तेल का इस्तेमाल होता है। एयर फ्रायर में फ्राई, रोस्ट और बेकिंग जैसे कई काम किए जा सकते हैं।
आजकल के नए मॉडल्स में पनीर, ग्रिल्ड चिकन, कटलेट, फ्रेंच फ्राइज और कई तरह के स्नैक्स भी आसानी से बनाए जा सकते हैं। कीमत की बात करें तो भारतीय बाजार में एयर फ्रायर लगभग 2500 रुपये से शुरू होकर 15,000 रुपये तक उपलब्ध है। यही वजह है कि मध्यम वर्गीय परिवार भी इसे एक वैकल्पिक किचन डिवाइस के तौर पर खरीद रहे हैं।
गैस की कमी के दौर में माइक्रोवेव ओवन भी एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है। पहले लोग इसे केवल खाना गर्म करने के लिए इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब कई घरों में इसका इस्तेमाल खाना पकाने के लिए भी होने लगा है। माइक्रोवेव में पास्ता, सब्जियां, सूप, चावल और कई तरह की डिश आसानी से तैयार की जा सकती हैं।
आधुनिक माइक्रोवेव ओवन में ग्रिल और रोस्टिंग जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं, जिससे कुकिंग के विकल्प और बढ़ जाते हैं। भारत में माइक्रोवेव ओवन की कीमत लगभग 5000 रुपये से शुरू होकर 80,000 रुपये तक जाती है। बजट से लेकर प्रीमियम तक हर तरह के मॉडल बाजार में मौजूद हैं।
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अगर घर में चावल ज्यादा बनते हैं तो राइस कुकर इस समय एक बेहद उपयोगी डिवाइस साबित हो रहा है। यह पूरी तरह बिजली से चलता है और इसमें चावल जल्दी और सही तरीके से पक जाते हैं। सिर्फ चावल ही नहीं, बल्कि इसमें पुलाव, खिचड़ी और स्टीम्ड सब्जियां भी बनाई जा सकती हैं।
कई परिवार इसे इसलिए भी पसंद कर रहे हैं क्योंकि इसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है और इसमें ज्यादा निगरानी की जरूरत नहीं होती। भारतीय बाजार में राइस कुकर की शुरुआती कीमत करीब 1500 रुपये के आसपास है और यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से उपलब्ध है।
इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट या इलेक्ट्रिक कुकिंग हीटर भी इन दिनों काफी चर्चा में है। यह लगभग पारंपरिक गैस चूल्हे की तरह काम करता है, फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें गैस की जगह बिजली का इस्तेमाल होता है। इस पर कढ़ाई या पैन रखकर सामान्य तरीके से सब्जी, दाल या अन्य खाना पकाया जा सकता है।
जो लोग गैस चूल्हे जैसा ही अनुभव चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छा विकल्प माना जा रहा है। बाजार में इसकी कीमत आमतौर पर 2000 से 3000 रुपये के बीच मिल जाती है, इसलिए बजट के लिहाज से भी यह कई लोगों के लिए आसान विकल्प बन गया है।
इलेक्ट्रिक पैन एक छोटा लेकिन बेहद काम का किचन डिवाइस है। इसमें पहले से ही हीटिंग एलिमेंट लगा होता है और यह सीधे बिजली से चलता है। इसमें अंडे, नूडल्स, सब्जियां और कई हल्की-फुल्की डिश आसानी से बनाई जा सकती हैं। खासकर छात्रों और छोटे परिवारों में यह काफी लोकप्रिय हो रहा है। ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इसकी कीमत लगभग 1000 रुपये के आसपास मिल जाती है, जिससे यह काफी किफायती विकल्प बन जाता है।
गैस सिलेंडर की कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या भविष्य की रसोई पूरी तरह गैस पर निर्भर रहनी चाहिए। यही वजह है कि अब कई परिवार धीरे-धीरे स्मार्ट और इलेक्ट्रिक किचन की तरफ बढ़ रहे हैं। तकनीक के साथ बदलती यह रसोई न सिर्फ सुविधाजनक है बल्कि कई मामलों में सुरक्षित और ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी एक कदम मानी जा रही है। अगर यही हालात बने रहते हैं तो आने वाले समय में भारतीय किचन में इलेक्ट्रिक कुकिंग डिवाइस की मौजूदगी और भी ज्यादा बढ़ सकती है।