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जियो-मेटा की दोस्ती से घबराए टेलीग्राम के CEO? (Img- AI Generated)
New Delhi: टेक जगत में रिलायंस और टेलीग्राम के बीच छिड़ा डिजिटल युद्ध अब इंटरनेट के सबसे बड़े अपहरण यानी 'BGP हाइजैकिंग' पर आ टिका है। टेलीग्राम के मालिक पावेल दुरोव का सनसनीखेज दावा है कि उनके लाखों विदेशी यूजर्स का रास्ता जानबूझकर रोका गया। इस विवाद ने मार्क जुकरबर्ग की 'मेटा' कंपनी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
आखिर क्या है यह अदृश्य और खतरनाक तकनीक, जो बिना किसी पासवर्ड को हैक किए भी पल भर में पूरी ऐप को ठप कर देती है? आइए सोशल मीडिया के इस नए 'क्रिप्टो-वॉर' और इसके पीछे के पूरे तकनीकी खेल को बेहद आसान भाषा में समझते हैं।
इस पूरे विवाद के केंद्र में 'BGP हाइजैकिंग' नाम की एक बेहद जटिल और खतरनाक तकनीक है। आसान शब्दों में कहें तो इसे आप डिजिटल दुनिया की 'इंटरनेट रूट डकैती' कह सकते हैं। इंटरनेट पर जब आप कुछ सर्च करते हैं, तो डेटा को सही पते तक पहुंचाने का काम 'BGP' नाम का एक सिस्टम (प्रोटोकॉल) करता है, जो इंटरनेट के 'जीपीएस' की तरह है।
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इस तकनीक में कोई हैकर या कंपनी इंटरनेट के रास्ते में गलत जानकारी फैला देती है कि "अमुक वेबसाइट (जैसे टेलीग्राम) का रास्ता मेरे नेटवर्क से होकर जाता है।" इसके बाद इंटरनेट का सारा ट्रैफिक भटककर असली सर्वर की जगह गलत रास्ते पर चला जाता है। इससे न सिर्फ ऐप ठप हो जाती है, बल्कि डेटा चोरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
पावेल दुरोव ने इस पूरे मामले को सिर्फ एक तकनीकी गड़बड़ी न बताते हुए इसे एक बड़े 'व्यावसायिक खेल' और प्रतिस्पर्धी लड़ाई से जोड़ दिया है। दुरोव ने सीधे तौर पर रिलायंस के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'जियो प्लेटफॉर्म्स' और मार्क जुकरबर्ग की कंपनी 'मेटा' (फेसबुक) के बीच के कनेक्शन पर उंगली उठाई है।
उनका इशारा है कि चूंकि व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा की जियो में हिस्सेदारी है, इसलिए टेलीग्राम को नुकसान पहुँचाने के लिए ऐसा किया जा रहा हो। हालांकि, कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, फेसबुक ने साल 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स में महज 9.99% की अल्पमत हिस्सेदारी खरीदी थी और इसका पूरा मालिकाना हक और कंट्रोलिंग ओनरशिप आज भी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है।
Location : New Delhi
Published : 17 June 2026, 10:24 AM IST