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देश में एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई को लेकर संकट गहराता दिख रहा है। लोकल सर्कल्स के सर्वे में खुलासा हुआ है कि 57 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर की डिलीवरी में देरी या कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर सिलिंडर के लिए 100 से 500 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं।
गैस की किल्लत या कालाबाजारी? (Img: Internet)
New Delhi: देश में रसोई गैस को लेकर एक खामोश लेकिन खतरनाक खेल चल रहा है। कहीं सिलिंडर की डिलीवरी देर से हो रही है, तो कहीं खुलेआम कालाबाजारी का धंधा फल-फूल रहा है। हालात ऐसे हैं कि गैस की जरूरत से परेशान लोग मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर सिलिंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। सरकारी दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि बाजार में घबराहट और जमाखोरी ने हालात बिगाड़ दिए हैं। एक ताजा सर्वे में खुलासा हुआ है कि देश के 57 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलिंडर मिलने में देरी या कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है।
ऑनलाइन सर्वे प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक बड़े सर्वेक्षण में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। इस सर्वे में देश के 309 जिलों के हजारों घरेलू उपभोक्ताओं की राय ली गई। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि गैस की उपलब्धता को लेकर लोगों के बीच अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। कई जगहों पर उपभोक्ताओं को सिलिंडर बुक करने के बाद भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कुछ जगहों पर डीलर खुद ही सप्लाई कम होने की बात कह रहे हैं।
सर्वे के मुताबिक 43 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि उनके गैस डीलर ने सप्लाई में किसी तरह की समस्या की बात नहीं कही। वहीं 21 प्रतिशत लोगों ने बताया कि डीलरों ने साफ कहा कि फिलहाल गैस की सप्लाई कम है। इसके अलावा 32 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें पहले ही बता दिया गया कि सिलिंडर की डिलीवरी में देरी हो सकती है।
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एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग और डिलीवरी को लेकर भी कई तरह की समस्याएं सामने आई हैं। सर्वे में शामिल 43 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें बुकिंग और डिलीवरी में कोई खास समस्या नहीं हुई। लेकिन दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सिलिंडर पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। करीब 29 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि डीलरों ने उन्हें सिलिंडर उपलब्ध न होने की बात कहकर बुकिंग में देरी कर दी।
करीब 7 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्हें सामान्य समय से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। वहीं 7 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें सिलिंडर की डिलीवरी के लिए कई बार डीलर के पास फॉलो-अप करना पड़ा।
सर्वे में सामने आया एक बड़ा खुलासा यह भी है कि कई इलाकों में एलपीजी सिलिंडर की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। सर्वे में शामिल 36 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके इलाके में गैस सिलिंडर की ब्लैक मार्केटिंग चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सप्लायर और बिचौलिए मिलकर प्रति सिलिंडर 100 से 500 रुपये तक अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं। कई मामलों में यह रकम इससे भी ज्यादा बताई गई है। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें एक सिलिंडर के लिए 1500 से 2500 रुपये तक देने पड़े, जो सामान्य कीमत से दो से चार गुना ज्यादा है। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में मुनाफाखोरी का खेल किस तरह चल रहा है।
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सर्वे में यह भी पता लगाने की कोशिश की गई कि लोगों को अतिरिक्त कितना भुगतान करना पड़ा। करीब 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके घर या आसपास एलपीजी की कालाबाजारी नहीं हो रही है। वहीं 8 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें प्रति सिलिंडर 100 रुपये तक ज्यादा खर्च करने पड़े। करीब 11 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने 100 से 300 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान किया। इसके अलावा 8 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें 300 से 500 रुपये ज्यादा देने पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी को लेकर फैली अफवाहों और घबराहट में खरीदारी की वजह से भी बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है। कई लोग एक से ज्यादा सिलिंडर जमा करने लगे हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। इसी का फायदा उठाकर कुछ डीलर और बिचौलिए ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह सप्लाई को सामान्य बनाए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करे।