हिंदी
केंद्र सरकार ने घरेलू गैस कनेक्शन को लेकर नया नियम लागू किया है। जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन है, उन्हें अब अपना LPG सिलेंडर कनेक्शन सरेंडर करना होगा, अन्यथा रिफिल की आपूर्ति बंद की जा सकती है।
PNG है तो LPG कनेक्शन करना होगा सरेंडर
New Delhi: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट की आशंका के बीच भारत में गैस की आपूर्ति और वितरण को लेकर सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। शहर-शहर गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर छापेमारी तेज हो गई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने घरेलू गैस कनेक्शन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए नया नियम लागू कर दिया है, जिससे लाखों उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश
केंद्र के Ministry of Petroleum and Natural Gas ने घरेलू गैस कनेक्शन को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक जिन घरों में पहले से पाइप्ड नेचुरल गैस यानी Piped Natural Gas का कनेक्शन मौजूद है, वे अब एक साथ घरेलू Liquefied Petroleum Gas कनेक्शन नहीं रख सकेंगे। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी गैस कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
LPG रिफिल भी नहीं मिलेगा
मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन उपभोक्ताओं के घर में PNG कनेक्शन है, उन्हें सरकारी तेल कंपनियों या उनके डिस्ट्रीब्यूटर्स से एलपीजी सिलेंडर का रिफिल उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। यानी यदि किसी के पास दोनों कनेक्शन हैं, तो उसे एक विकल्प चुनना होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला
सरकार का कहना है कि कई जगहों पर लोग PNG और LPG दोनों कनेक्शन साथ-साथ रख रहे हैं। इससे गैस वितरण प्रणाली में असमानता पैदा होती है और कई बार संसाधनों का दुरुपयोग भी होता है। मंत्रालय के अनुसार यह कदम घरेलू गैस के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और प्रभावी वितरण प्रणाली को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
उपभोक्ताओं को जल्द करना होगा सरेंडर
यह आदेश खास तौर पर उन लोगों के लिए लागू होगा जिनके घर में पहले से PNG कनेक्शन मौजूद है। मंत्रालय ने ऐसे उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दें। यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में उन्हें एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी जाएगी।
हल्द्वानी में गैस संकट गहराया: मेडिकल कॉलेज में रोटियां बनना हुआ मुश्किल; लकड़ी से बन रहा खाना
कालाबाजारी रोकने पर भी जोर
सरकार का मानना है कि इस फैसले से गैस सिलेंडरों की अनावश्यक मांग कम होगी और कालाबाजारी या अवैध भंडारण जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। ऊर्जा संकट की आशंका के बीच गैस संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर यह कदम अहम माना जा रहा है।