हिंदी
ऑनलाइन मनी गेम बैन होने से सरकार को कितना होगा घाटा? (Img: Internet)
New Delhi: पैसे के लिए खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स के संचालन, विज्ञापन और वित्तीय लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने वाला 'ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025' बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया। सरकार का कहना है कि यह विधेयक ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से बढ़ रही लत, मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक धोखाधड़ी पर नियंत्रण के उद्देश्य से लाया गया है।
यह विधेयक केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लोकसभा में पेश किया गया और विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच इसे बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। विपक्ष बिहार में कथित 'SIR' घोटाले पर चर्चा की मांग कर रहा था, जिस कारण सदन में शोर-शराबा जारी रहा और विधेयक पर बहस नहीं हो सकी। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
भारत में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार इस समय लगभग 32,000 करोड़ रुपये का है। इसमें से 86% राजस्व रियल मनी फॉर्मेट से आता है। 2029 तक इसके लगभग 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद थी। लेकिन इस प्रतिबंध से ड्रीम 11, गेम्स 24x7, विंजो, गेम्सक्राफ्ट, Rummy Circle जैसी बड़ी कंपनियां मुश्किल में पड़ सकती हैं। यह बंद भी हो सकती हैं। उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि सरकार के इस कदम से 2 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के टैक्स का नुकसान भी हो सकता है।
ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण की स्थापना:
सरकार को ऑनलाइन मनी गेमिंग से हर साल लगभग ₹15,000 से ₹20,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है, जिसमें मुख्य रूप से 28% GST और 30% TDS (आयकर) शामिल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, 2023-24 के केवल छह महीनों में ही इस सेक्टर से ₹6,909 करोड़ का GST संग्रह हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 412% अधिक है। इसके अलावा, गेमिंग में जीती गई राशि पर 30% की दर से टैक्स वसूला जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऑनलाइन मनी गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया, तो सरकार को ₹20,000 करोड़ तक के वार्षिक टैक्स नुकसान का खतरा है।
Location : New Delhi
Published : 21 August 2025, 9:42 AM IST